ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच गुजरात पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। राज्य में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ के तहत पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी से जुटाई गई रकम का लेनदेन कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि केवल 13 बैंक खातों के माध्यम से करीब 398.43 करोड़ रुपये का संदिग्ध और अवैध लेनदेन किया गया। मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से की गई।
जांच के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और केंद्र सरकार के समन्वय प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डेटा का विश्लेषण किया गया। इसी दौरान पाटन जिले के हारिज नागरिक सहकारी बैंक में खोले गए कुछ चालू खातों में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले।
इसके बाद साइबर अपराध शाखा ने विस्तृत जांच शुरू की, जिसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ।
228 शिकायतों से जुड़ा निकला नेटवर्क
पुलिस की जांच में पता चला कि इन बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों से दर्ज 228 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से है।
ये शिकायतें ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से जुड़ी बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियों ने पाया कि साइबर अपराध से हासिल रकम को इन खातों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर किया जाता था।
यही वजह है कि इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ की श्रेणी में रखा गया।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
जांच में सामने आया कि गिरोह आम लोगों को कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था।
इसके बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी हासिल कर ली जाती थी। एक बार नियंत्रण मिलने के बाद साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन और ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए करते थे।
कई मामलों में खाताधारकों को यह भी पूरी जानकारी नहीं होती थी कि उनके खाते का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
14 आरोपी गिरफ्तार, 6 की तलाश जारी
पाटन साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस ने 13 खाताधारकों और 7 बिचौलियों समेत कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें से 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि 6 अन्य की तलाश जारी है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है।
‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ क्यों है अहम?
साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे खाते अपराधियों और ठगी की रकम के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं।
इसी खतरे को देखते हुए गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य उन बैंक खातों और व्यक्तियों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा अवैध लेनदेन के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे वित्तीय नेटवर्क को समय रहते नष्ट नहीं किया गया तो ऑनलाइन ठगी के मामलों पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है।
साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति कमीशन या पैसे का लालच देकर बैंक खाता इस्तेमाल करने की बात करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दें।
गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। 398.43 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े इस नेटवर्क का खुलासा बताता है कि साइबर अपराधी अब फर्जी बैंक खातों के जरिए अपने वित्तीय तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई ही इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगा सकती है।