उत्तर प्रदेश: में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की कई योजनाएं जमीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं। आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर कई किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़ रहे हैं और बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के Barabanki जिले के किसान Neeraj Patel की है, जिन्होंने फूलों की खेती से अपनी जिंदगी बदल दी।
नीरज पटेल ने सरकार की National Horticulture Mission योजना का लाभ लेकर पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों की खेती शुरू की। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वे हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
पारंपरिक खेती से अलग करने का लिया फैसला
नीरज पटेल के परिवार में पहले से ही खेती की जाती थी, लेकिन वह पारंपरिक फसलों पर आधारित थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद नीरज ने भी खेती को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने कुछ नया और अलग करने की ठानी।
एक दिन वह उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्हें आधुनिक तकनीक से की जाने वाली जरबेरा फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली। यह जानकारी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने तय किया कि वह पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती को अपनाएंगे।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला सहयोग
नीरज पटेल ने सरकार की National Horticulture Mission के तहत आवेदन किया। वर्ष 2018 में उन्हें इस योजना के अंतर्गत लगभग 29.5 लाख रुपये का ऋण मिला और कुछ महीनों बाद सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की गई।
सरकार के इस सहयोग से उनके लिए आधुनिक खेती शुरू करना काफी आसान हो गया। उन्होंने अपने खेत में पॉलीहाउस तकनीक के माध्यम से फूलों की खेती शुरू की।
पॉलीहाउस तकनीक से खेती
नीरज पटेल ने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया। पॉलीहाउस बनाने में लगभग 70 से 75 लाख रुपये की लागत आई। इस तकनीक के जरिए मौसम के प्रभाव को नियंत्रित किया जाता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।
आज उनके पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं। यह पौधे रोजाना फूल देते हैं और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह साल तक उत्पादन करते रहते हैं।

ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत
नीरज अपने पॉलीहाउस में आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक के जरिए पौधों को बूंद-बूंद पानी दिया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पोषण मिलता है।
यह तकनीक काफी हद तक इजरायली खेती पद्धति पर आधारित है, जिसे दुनिया की सबसे आधुनिक कृषि तकनीकों में से एक माना जाता है।
खेती से रोजगार के अवसर
नीरज पटेल की इस पहल का लाभ केवल उन्हें ही नहीं बल्कि आसपास के लोगों को भी मिल रहा है। उन्होंने अपने फार्म में पांच लोगों को रोजगार दिया है, जिससे गांव के लोगों के लिए भी आय का नया स्रोत बना है।
इस तरह आधुनिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही है।
हर साल लाखों की कमाई
जरबेरा फूलों की बाजार में काफी मांग रहती है। शादी, समारोह, होटल डेकोरेशन और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
इसी वजह से नीरज को अपने फूलों की बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती। उन्होंने बताया कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर साल लगभग 8 से 10 लाख रुपये तक की बचत हो जाती है।
नीरज पटेल की सफलता ने आसपास के कई किसानों को भी प्रेरित किया है। अब कई किसान पारंपरिक खेती के बजाय फूलों और अन्य उच्च लाभ वाली फसलों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का सही उपयोग किसानों की जिंदगी बदल सकता है। बाराबंकी के किसान नीरज पटेल की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। जरबेरा फूलों की खेती के जरिए उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई बल्कि अन्य किसानों को भी नई दिशा दी है। यह कहानी बताती है कि यदि सही जानकारी और सरकारी सहयोग मिले तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।