‘बस बहुत हुआ!’ फारूक अब्दुल्ला का पाकिस्तान को अल्टीमेटम—क्या खत्म होगा जम्मू-कश्मीर में हिंसा का दौर?

जम्मू-कश्मीर: में बढ़ती हिंसा और हालिया आतंकी घटनाओं के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष Farooq Abdullah ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“बस बहुत हुआ”, और पड़ोसी देश से जम्मू-कश्मीर में हिंसा का सिलसिला तुरंत बंद करने की अपील की।

फारूक अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में Pahalgam में हुए आतंकी हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी गहरा असर डाला।

‘कश्मीर के लोग अब आतंकवाद नहीं चाहते’

एक साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अब पूरी तरह आतंकवाद के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की जनता शांति चाहती है और हिंसा से थक चुकी है।
उन्होंने पाकिस्तान को सीधे संदेश देते हुए कहा कि अगर वह वास्तव में क्षेत्र में स्थिरता चाहता है, तो उसे हिंसा और आतंकवाद का समर्थन तुरंत बंद करना होगा।

पहलगाम हमला—शांति प्रयासों को बड़ा झटका

फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले को “भाईचारे और शांति की कोशिशों के लिए बड़ा झटका” बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ जान-माल का नुकसान करती हैं, बल्कि लोगों के बीच अविश्वास भी बढ़ाती हैं।

हमले के बाद कश्मीर घाटी में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जो इस बात का संकेत था कि आम नागरिक अब आतंकवाद को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

‘पाकिस्तान को बदलनी होगी सोच’

अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग न मानना ही कई समस्याओं की जड़ है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को युद्ध की बजाय शांति और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

उनका कहना था कि “युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बातचीत और समझदारी ही आगे का रास्ता है।”

अब नया खतरा—ड्रग्स का बढ़ता जाल

फारूक अब्दुल्ला ने एक और गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा खतरा सिर्फ आतंकवाद नहीं, बल्कि ड्रग्स का तेजी से फैलता जाल है।

उन्होंने चिंता जताई कि कुछ स्थानीय लोग भी इस अवैध कारोबार में शामिल हो रहे हैं, जो युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर सकता है।
अब्दुल्ला ने सरकार के साथ-साथ समाज के हर वर्ग से अपील की कि इस समस्या से निपटने के लिए मिलकर काम किया जाए।

‘यह लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं’

उन्होंने कहा कि ड्रग्स और हिंसा के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भी है। माता-पिता, शिक्षक और समाज के अन्य लोग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक और सामाजिक संदेश

फारूक अब्दुल्ला का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक संदेश भी है। यह साफ संकेत देता है कि अब कश्मीर में शांति की मांग पहले से ज्यादा मजबूत हो रही है और लोग हिंसा के चक्र से बाहर निकलना चाहते हैं।

फारूक अब्दुल्ला का “बस बहुत हुआ” वाला बयान जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर एक मजबूत प्रतिक्रिया है। उन्होंने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए शांति का रास्ता अपनाने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कश्मीर के लोग अब आतंकवाद नहीं, बल्कि स्थिरता और विकास चाहते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह की अपीलों का क्षेत्रीय हालात पर कोई ठोस असर पड़ता है।

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