अब खुलेंगे आगरा किले के बंद दरवाजों के राज! शीशमहल की अंदरूनी चमक पहली बार स्क्रीन पर देख सकेंगे पर्यटक

20 साल से बंद पड़े आगरा किले के ऐतिहासिक शीशमहल की भव्यता अब LED स्क्रीन पर दिखाई जाएगी। पर्यटक जान सकेंगे कि आखिर अंदर ऐसा क्या है जिसे आम लोगों से छिपाकर रखा गया था।

उत्तर प्रदेश: के आगरा में स्थित विश्व प्रसिद्ध आगरा किला अब पर्यटकों के लिए एक नया और रोमांचक अनुभव लेकर आने वाला है। वर्षों से बंद पड़े ऐतिहासिक शीशमहल की अंदरूनी भव्यता अब आम लोग भी देख सकेंगे। हालांकि पर्यटकों को अभी भी शीशमहल के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसकी खूबसूरती दिखाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।

ASI ने फैसला किया है कि आगरा किले के शीशमहल और मुसम्मन बुर्ज के बाहर बड़ी LED स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिन पर इन ऐतिहासिक स्थलों की अंदरूनी बनावट, इतिहास और विशेषताओं से जुड़े वीडियो चलाए जाएंगे। इससे पर्यटक पहली बार उस हिस्से को करीब से देख पाएंगे, जो अब तक रहस्य बना हुआ था।

2003 से बंद है शीशमहल

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार ने जानकारी दी कि वर्ष 2003 में सुरक्षा कारणों से शीशमहल को आम पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। दरअसल, जब यह स्मारक खुला था तब कुछ पर्यटक यहां लगे ऐतिहासिक कांच और सजावटी हिस्सों को नुकसान पहुंचाने लगे थे। इससे स्मारक की मूल भव्यता प्रभावित होने लगी थी।

इसके बाद ASI ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। लेकिन लगातार पर्यटकों और विदेशी मेहमानों की जिज्ञासा को देखते हुए अब एक नया समाधान निकाला गया है। अगले दो महीनों के भीतर LED स्क्रीन लगाकर शीशमहल की अद्भुत दुनिया लोगों के सामने पेश की जाएगी।

क्या खास है शीशमहल में?

आगरा किले के अंदर स्थित शीशमहल मुगल वास्तुकला का अनोखा नमूना माना जाता है। इसे मुगल बादशाह शाहजहां ने 1631 से 1640 के बीच बनवाया था। इस महल की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष कांच है, जिसे सीरिया के हलब शहर से मंगवाया गया था। इसे “शीशा-ए-हलबी” कहा जाता था।

महल की दीवारों और छतों पर छोटे-छोटे शीशों की कलात्मक सजावट की गई थी। कहा जाता है कि अंधेरे में अगर एक छोटी सी रोशनी भी जलाई जाए तो पूरा महल हजारों चमकते अक्सों से जगमगा उठता था।

इतिहासकार बताते हैं कि शीशमहल में गर्म और ठंडे पानी के विशेष टैंक बनाए गए थे। इसके साथ ही यहां फव्वारों की भी व्यवस्था थी, जिससे यह हर मौसम में आरामदायक बना रहता था।

‘मुगल-ए-आजम’ फिल्म से बढ़ी लोकप्रियता

शीशमहल का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना “प्यार किया तो डरना क्या” याद आ जाता है। उस गाने में दिखाया गया कांच का महल इसी ऐतिहासिक शीशमहल से प्रेरित था। फिल्म में अनारकली के हजारों प्रतिबिंब जिस तरह दिखाई देते हैं, वैसी ही चमक असली शीशमहल में भी देखने को मिलती थी।

इसी वजह से यह जगह लंबे समय से पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

मुसम्मन बुर्ज की कहानी भी दिखाई जाएगी

केवल शीशमहल ही नहीं, बल्कि आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज की कहानी भी LED स्क्रीन पर दिखाई जाएगी। इतिहास के अनुसार, मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को इसी बुर्ज में कैद करके रखा था।

यहीं से शाहजहां अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में बने ताजमहल को देखा करते थे। यह बुर्ज मुगल इतिहास के सबसे भावुक अध्यायों में से एक माना जाता है।

पर्यटकों को मिलेगा डिजिटल अनुभव

ASI का मानना है कि नई तकनीक के जरिए पर्यटकों को बेहतर अनुभव दिया जा सकता है। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहेगी, बल्कि लोग उसकी भव्यता भी महसूस कर सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल भारत के ऐतिहासिक स्मारकों को डिजिटल रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे विदेशी पर्यटकों के बीच भी आगरा किले की लोकप्रियता और बढ़ सकती है।

आगरा किले का शीशमहल वर्षों से रहस्य और आकर्षण का केंद्र रहा है। अब LED स्क्रीन के जरिए पर्यटक इसकी अद्भुत दुनिया से रूबरू हो सकेंगे। ASI की यह पहल इतिहास और तकनीक का शानदार मेल साबित हो सकती है। इससे न केवल स्मारकों की सुरक्षा होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी भारत की समृद्ध विरासत को करीब से महसूस कर पाएंगी।

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