प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी की एक अपील ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से “एक साल तक सोना न खरीदने” की अपील किए जाने के बाद ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलते ही टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेन्को गोल्ड और पीएन गाडगिल जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 10 प्रतिशत तक टूट गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि सरकार की संभावित आर्थिक रणनीति का संकेत भी हो सकती है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
किन कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा गिरे?
सोमवार के कारोबार में—
- कल्याण ज्वेलर्स के शेयर करीब 10% टूट गए
- सेन्को गोल्ड में भी लगभग 10% की गिरावट आई
- टाइटन कंपनी के शेयर 7% तक फिसले
- पीएन गाडगिल ज्वेलर्स में 8% कमजोरी रही
- थंगमयिल ज्वेलरी के शेयर 6% तक लुढ़के
इसके अलावा छोटे और मिडकैप ज्वेलरी शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में सरकार गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है, जिससे ज्वेलरी कारोबार पर दबाव बढ़ेगा।

पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को फिलहाल अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने तीन प्रमुख सुझाव दिए—
- एक साल तक सोना न खरीदें
- वर्क फ्रॉम होम कल्चर अपनाएं
- गैर जरूरी यात्राओं और विदेश दौरों से बचें
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
क्यों डर गया बाजार?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील के पीछे सरकार का बड़ा आर्थिक संदेश छिपा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है और हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करता है।
सोने के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में अगर सरकार आयात कम करने के लिए सख्त कदम उठाती है, तो ज्वेलरी इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इसी आशंका के चलते निवेशकों ने ज्वेलरी शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ सकती है?
सेन्को गोल्ड के प्रबंध निदेशक सुवंकर सेन ने CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद गोल्ड इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाती है, तो देश में सोने की मांग 10% से 12% तक घट सकती है।
सुवंकर सेन ने यह भी बताया कि ज्वेलरी एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उद्योग की चिंताओं को सामने रखेंगे।
30 साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है सोना आयात
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोना आयात पिछले 30 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों पर अचानक 3% इंटीग्रेटेड GST की मांग लागू होने के बाद कई बैंकों ने सोने के शिपमेंट रोक दिए हैं।
भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात करता है, जिस पर लगभग 6 बिलियन डॉलर यानी करीब 57 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
अगर सरकार आयात को नियंत्रित करने के लिए और सख्त कदम उठाती है, तो इसका असर पूरे गोल्ड मार्केट और ज्वेलरी कारोबार पर दिखाई दे सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल ज्वेलरी सेक्टर में अस्थिरता बनी रह सकती है। सरकार की अगली आर्थिक नीति और इम्पोर्ट ड्यूटी से जुड़े फैसलों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में मजबूत ब्रांड और संगठित ज्वेलरी कंपनियां इस दबाव से उबर सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने वाली अपील का असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया है। ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि बाजार सरकार की संभावित आर्थिक नीतियों को लेकर सतर्क हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार गोल्ड इम्पोर्ट और टैक्स को लेकर आगे क्या फैसला लेती है।