प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए देशवासियों से एक बार फिर ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा की खपत कम करने की अपील की है। लगातार दूसरे दिन दिए गए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर वैश्विक संकटों में से एक हैं और भारत को इससे सतर्क रहने की जरूरत है।
गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने और अनावश्यक विदेशी खर्चों से बचने का आग्रह किया। उन्होंने खास तौर पर सोना खरीदने जैसी गैर-जरूरी चीजों को फिलहाल टालने की सलाह दी ताकि देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर साल कई जरूरी वस्तुओं के आयात पर लाखों करोड़ रुपये खर्च करता है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, तब देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि “जब भी देश पर कोई बड़ा संकट आया है, भारत के नागरिकों ने हमेशा जिम्मेदारी निभाई है। आज भी जरूरत है कि हम सभी छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दें।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने लोगों से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और बस, मेट्रो तथा अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को भी भविष्य के लिए जरूरी कदम बताया।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विदेश यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग के बढ़ते ट्रेंड पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छुट्टियां शुरू होते ही बड़ी संख्या में भारतीय परिवार विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं, जिससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

प्रधानमंत्री ने सवाल करते हुए कहा, “क्या भारत में घूमने के लिए सुंदर और ऐतिहासिक जगहों की कमी है?” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देश के भीतर पर्यटन को बढ़ावा दें और बच्चों को भारत की संस्कृति, इतिहास और विरासत से परिचित कराएं।
उन्होंने कहा कि भारत में ही ऐसी कई अद्भुत जगहें हैं जो दुनिया भर के पर्यटन स्थलों को टक्कर देती हैं। यदि लोग देश में ही यात्रा करेंगे तो इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सरदारधाम-3’ शैक्षणिक संकुल का उद्घाटन भी किया। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल की भूमिका को याद किया।
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि उन्हें सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित अमृत महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने युवाओं और स्टार्टअप सेक्टर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को केवल डिग्री के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के अवसर मिलने चाहिए। इससे आने वाले समय में भारत के पास एक बड़ा और कुशल कार्यबल तैयार होगा।
उन्होंने गुजरात के युवाओं की उद्यमशीलता की तारीफ करते हुए कहा कि ‘स्टार्टअप इंडिया’ मिशन छोटे शहरों के युवाओं को भी नए अवसर दे रहा है। अब ऐसे क्षेत्र जिन्हें पहले जोखिम भरा माना जाता था, वे युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी स्टार्टअप सेक्टर में लगातार बढ़ रही है, जो भारत की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार जनता को पहले से सतर्क करने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा संदेश है। पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार चाहती है कि देशवासी विदेशी खर्च कम करें, स्थानीय पर्यटन और स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा दें तथा छोटे-छोटे प्रयासों से भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं।