अब PCOS नहीं PMOS! महिलाओं की इस बीमारी का नाम क्यों बदला गया? डॉक्टरों ने बताई बड़ी वजह

महिलाओं की आम बीमारी PCOS का बदला नाम, अब कहलाएगा PMOS

महिलाओं: में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्याओं के बीच एक बड़ा बदलाव सामने आया है। लंबे समय से “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” यानी PCOS के नाम से जानी जाने वाली बीमारी को अब नया नाम दिया गया है। विशेषज्ञों ने इसे “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम” यानी PMOS कहना शुरू कर दिया है।

डॉक्टरों का मानना है कि PCOS शब्द इस बीमारी की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता था। यही वजह है कि अब इसे केवल ओवरी की समस्या नहीं बल्कि पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी के रूप में देखा जा रहा है।

आखिर क्यों बदला गया PCOS का नाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, PCOS नाम में शामिल “Cyst” शब्द लोगों में भ्रम पैदा करता था। अधिकतर महिलाओं को लगता था कि इस बीमारी में अंडाशय में सिस्ट यानी गांठें होना जरूरी है, जबकि ऐसा हर मामले में नहीं होता।

कई महिलाओं में PCOS के लगभग सभी लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड में किसी प्रकार की सिस्ट नहीं मिलती। इसी कारण मेडिकल विशेषज्ञों ने महसूस किया कि इस बीमारी का नाम वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता।

नए नाम PMOS में “Polyendocrine” और “Metabolic” शब्द जोड़े गए हैं, जिससे यह साफ हो सके कि यह बीमारी सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं बल्कि पूरे हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिस्टम को प्रभावित करती है।

सिर्फ ओवरी नहीं, पूरे शरीर को प्रभावित करती है बीमारी

डॉक्टरों के अनुसार PMOS को अब केवल रिप्रोडक्टिव हेल्थ की समस्या नहीं माना जा रहा है। यह शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोन असंतुलन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी जटिल स्थिति है।

इस बीमारी में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिसके कारण ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। यही वजह है कि कई महिलाओं में तेजी से वजन बढ़ना, थकान, कमजोरी और हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या को नियंत्रित नहीं किया जाए तो भविष्य में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

PMOS के मुख्य लक्षण क्या हैं?

PMOS के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में यह समस्या गंभीर रूप में सामने आती है, जबकि कई मामलों में शुरुआती संकेत हल्के होते हैं।

सबसे सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • अनियमित पीरियड्स
  • तेजी से वजन बढ़ना
  • चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल
  • मुंहासे और ऑयली स्किन
  • बालों का झड़ना
  • थकान और कमजोरी
  • मूड स्विंग्स
  • गर्भधारण में परेशानी

डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती पहचान से बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

महिलाओं में तेजी से क्यों बढ़ रही है यह समस्या?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खराब लाइफस्टाइल, तनाव, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी PMOS के मामलों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। कम उम्र की लड़कियों में भी यह समस्या अब सामान्य होती जा रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल लाइफस्टाइल, देर रात तक जागना और असंतुलित खानपान हार्मोनल असंतुलन को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और हेल्दी रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं।

नया नाम क्यों माना जा रहा है जरूरी?

डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का कहना है कि PMOS नाम बीमारी की जटिलता को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करेगा। इससे महिलाओं में जागरूकता बढ़ेगी और वे इसे सिर्फ “ओवरी की बीमारी” समझकर नजरअंदाज नहीं करेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही नामकरण से डॉक्टरों को भी बीमारी का व्यापक इलाज करने में मदद मिलेगी। इससे केवल पीरियड्स या फर्टिलिटी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा सकेगा।

समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी महिला को लंबे समय तक अनियमित पीरियड्स, अचानक वजन बढ़ना या हार्मोनल बदलाव जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

हालांकि सही लाइफस्टाइल, संतुलित आहार और नियमित मेडिकल सलाह के जरिए PMOS को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

PCOS का नया नाम PMOS रखा जाना केवल शब्दों का बदलाव नहीं बल्कि महिलाओं की इस बीमारी को व्यापक रूप से समझने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव बीमारी की सही पहचान, बेहतर इलाज और महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा। समय रहते लक्षणों की पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

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