IPO से पहले Zepto पर ED की नजर! फाउंडर्स आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा को मिला समन, निवेशकों की बढ़ी चिंता

भारत: के तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी Zepto का प्रस्तावित आईपीओ बाजार में आने से पहले चर्चा में आ गया है। कंपनी द्वारा दाखिल किए गए ड्राफ्ट दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी के सह-संस्थापकों Aadit Palicha और Kaivalya Vohra को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत समन जारी किया था।

यह जानकारी कंपनी द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के समक्ष दाखिल किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में सामने आई है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि समन का जवाब देने के बाद अब तक ईडी की ओर से कोई नई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

अप्रैल में जारी हुआ था समन

ड्राफ्ट दस्तावेज के अनुसार, ईडी ने 8 अप्रैल को दोनों फाउंडर्स को समन जारी किया था। एजेंसी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कंपनी और उनकी व्यक्तिगत हिस्सेदारी से जुड़ी कई जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए कहा था।

मांगी गई जानकारी में विदेशी निवेश, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, ऑडिटेड वित्तीय विवरण, बैंक खातों की जानकारी, आयकर रिटर्न, ऋण और गारंटी से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे।

इसके अलावा कंपनी की कारोबारी संरचना और संचालन मॉडल से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए थे।

किन दस्तावेजों की हुई मांग?

ईडी ने Zepto और उसके प्रमोटरों से वित्त वर्ष 2020-21 से संबंधित ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की जानकारी मांगी।

इसके साथ ही कंपनी के होल्डिंग स्ट्रक्चर, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी, व्यावसायिक समझौतों, इनवॉइस, बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की गई।

सूत्रों के अनुसार, यह पूछताछ FEMA नियमों के अनुपालन और विदेशी निवेश से जुड़े पहलुओं को समझने के उद्देश्य से की गई थी।

कंपनी ने क्या कहा?

Zepto ने अपने ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में कहा है कि ईडी द्वारा मांगी गई जानकारी और दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए गए थे।

कंपनी ने यह भी बताया कि जवाब जमा करने के बाद अब तक एजेंसी की ओर से कोई अतिरिक्त नोटिस या सूचना नहीं मिली है।

हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस बात की गारंटी नहीं दे सकती कि भविष्य में इस मामले में कोई अतिरिक्त जांच, कानूनी कार्रवाई या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

IPO निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह खुलासा?

किसी भी कंपनी के आईपीओ से पहले उसके ड्राफ्ट दस्तावेजों में संभावित कानूनी, नियामकीय और वित्तीय जोखिमों का खुलासा करना अनिवार्य होता है।

इसी कारण Zepto ने इस मामले को अपने रिस्क फैक्टर्स और प्रमोटर्स से जुड़े कानूनी मामलों वाले सेक्शन में शामिल किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जानकारी निवेशकों को कंपनी से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन करने में मदद करती है।

हालांकि फिलहाल यह मामला केवल पूछताछ और सूचना संग्रह के स्तर पर बताया जा रहा है।

8,000 करोड़ रुपये का हो सकता है IPO

Zepto का प्रस्तावित आईपीओ इस साल के सबसे चर्चित पब्लिक इश्यू में से एक माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी करीब 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि कुछ हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेची जा सकती है।

SEBI से इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद कंपनी लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है।

जुटाई गई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी के अनुसार, आईपीओ से प्राप्त राशि का उपयोग कारोबार विस्तार के लिए किया जाएगा।

Zepto अपनी डार्क स्टोर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्लाउड सिस्टम में निवेश करने की योजना बना रही है।

इसके अलावा कंपनी अपनी सहायक इकाई के माध्यम से मार्केटिंग, ब्रांड प्रमोशन और ग्राहक विस्तार कार्यक्रमों पर भी खर्च करेगी।

भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर पर नजर

पिछले कुछ वर्षों में भारत का क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ा है। कुछ ही मिनटों में किराना और दैनिक जरूरत का सामान पहुंचाने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

ऐसे माहौल में Zepto का आईपीओ निवेशकों और बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि ईडी से जुड़े खुलासे ने कंपनी की सार्वजनिक पेशकश से पहले चर्चा का एक नया पहलू जोड़ दिया है।

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