“मैं बच गया, लेकिन हर दिन मर रहा हूं…” अहमदाबाद विमान हादसे के एक साल बाद छलका इकलौते जीवित बचे यात्री का दर्द

अहमदाबाद: देश को झकझोर देने वाले अहमदाबाद विमान हादसे को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। लेकिन हादसे से जुड़े घाव अब भी ताजा हैं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह दिन सिर्फ एक बरसी नहीं बल्कि दर्द, सवालों और अधूरे न्याय की याद दिलाने वाला दिन बन गया है। हादसे के एकमात्र जीवित बचे ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश ने पहली बरसी पर भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें अब भी सच्चाई, पारदर्शिता और न्याय का इंतजार है।

विश्वास कुमार रमेश उस भयावह विमान दुर्घटना के अकेले जीवित बचे व्यक्ति थे, जिसमें सैकड़ों लोगों की जिंदगी पल भर में खत्म हो गई थी। इस हादसे में उन्होंने अपने भाई को भी खो दिया। एक साल बाद भी उनकी यादों में वह खौफनाक मंजर जिंदा है।

“आंखें बंद करता हूं तो चीखें सुनाई देती हैं”

बरसी के मौके पर विश्वास कुमार रमेश ने कहा कि दुर्घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि जब भी वह आंखें बंद करते हैं, उन्हें आग की लपटें, लोगों की चीखें और अफरातफरी का वह भयावह दृश्य दिखाई देता है।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं जीवित जरूर हूं, लेकिन हर दिन मानसिक पीड़ा के साथ जी रहा हूं। इस हादसे ने मेरे जीवन से बहुत कुछ छीन लिया। मैं बच गया, लेकिन इसकी कीमत मैं हर दिन अपनी आत्मा का एक हिस्सा देकर चुका रहा हूं।”

विश्वास का कहना है कि हादसे के एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल अनुत्तरित है—आखिर विमान दुर्घटना का वास्तविक कारण क्या था?

जांच रिपोर्ट का अब भी इंतजार

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कुछ समय पहले संकेत दिया था कि दुर्घटना की जांच अंतिम चरण में है और बरसी तक रिपोर्ट सामने आ सकती है। लेकिन एक वर्ष पूरा होने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी।

यही बात पीड़ित परिवारों की चिंता का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। परिवारों का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? क्या हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या फिर कहीं कोई मानवीय चूक हुई थी?

विश्वास कुमार रमेश ने कहा कि पीड़ित परिवारों को कम से कम यह जानने का अधिकार है कि उनके अपनों की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

“हमें सिर्फ तीन चीजें चाहिए”

विश्वास कुमार ने कहा कि हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवार अब केवल तीन चीजों की मांग कर रहे हैं—ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही।

उन्होंने कहा, “कोई भी रिपोर्ट मेरे भाई को वापस नहीं ला सकती। न ही उन सैकड़ों लोगों को लौटा सकती है जिन्होंने उस दिन अपनी जान गंवाई। लेकिन हमें सच जानने का अधिकार जरूर है।”

उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल पीड़ित परिवारों के लिए जरूरी है बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मुआवजे को लेकर भी सवाल

एक तरफ एयर इंडिया और टाटा समूह का दावा है कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को अंतरिम मुआवजा प्रदान कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार मृतकों के लगभग 96 प्रतिशत परिवारों को 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता दी जा चुकी है।

हालांकि कुछ परिवारों का कहना है कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। कई मामलों में दस्तावेजी प्रक्रियाएं, कानूनी विवाद और अन्य तकनीकी कारणों से मुआवजा अटका हुआ है।

विश्वास कुमार रमेश और अन्य प्रभावित लोगों का आरोप है कि आर्थिक सहायता के अलावा मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

PTSD से जूझ रहे पीड़ित

विशेषज्ञों के अनुसार बड़े हादसों से बचे लोगों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) की समस्या आम होती है। विश्वास कुमार सहित कई प्रभावित लोग आज भी मानसिक तनाव, भय और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

अहमदाबाद निवासी अजय परमार जैसे अन्य सर्वाइवर्स भी लगातार मानसिक आघात से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद सामान्य जीवन में लौटना बेहद कठिन साबित हुआ है।

विदेशों में रहने वाले पीड़ितों की शिकायत

ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश ने यह भी कहा कि विदेश में रहने वाले प्रभावित परिवारों को अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों से बातचीत हुई, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी लंबित हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होगी और सभी प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सकेगा।

एक साल बाद भी बाकी हैं कई सवाल

हादसे के एक वर्ष बाद भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। जांच रिपोर्ट कब आएगी? दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी? सभी प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा कब मिलेगा? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार किए गए हैं?

इन सवालों के जवाब आज भी हजारों लोगों को इंतजार करा रहे हैं।

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