महाराष्ट्र: की राजनीति एक बार फिर बड़े सियासी घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में संभावित बगावत की चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई स्थित अपने निवास ‘मातोश्री’ में सभी लोकसभा सांसदों की आपात बैठक बुलाई। लेकिन इस बैठक से तीन सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा शिरडी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे को लेकर हो रही है, जिनका फोन बंद बताया जा रहा है और जिनसे पार्टी नेतृत्व भी संपर्क नहीं कर पा रहा है। इसके साथ ही दो अन्य सांसदों की अनुपस्थिति ने शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
आखिर क्यों बुलाई गई थी आपात बैठक?
जानकारों के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने आगामी संसद सत्र और बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। दिल्ली में मौजूद सांसदों को भी तत्काल मुंबई पहुंचने का निर्देश दिया गया था।
बैठक का उद्देश्य पार्टी की रणनीति तैयार करना और संभावित राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करना था। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही सांसदों की अनुपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम का केंद्र बदल दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे को अपने सांसदों के टूटने का डर सता रहा है, इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में यह बैठक आयोजित की।
भाऊसाहेब वाकचौरे का फोन बंद, बढ़ा सस्पेंस
सबसे बड़ा सस्पेंस शिरडी सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे को लेकर बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार उनका मोबाइल फोन बंद है और वे पिछले दो दिनों से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।
बताया जा रहा है कि वे अपने परिवार के साथ कहीं बाहर गए हैं, जबकि उनके निवास पर भी ताला लगा हुआ है। उनके निजी सहायक से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या वे किसी नए राजनीतिक कदम की तैयारी में हैं?

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा ‘ऑपरेशन टाइगर’ की हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का यह राजनीतिक मिशन उद्धव गुट के सांसदों और नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
हाल के दिनों में शिंदे गुट और सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद उनके संपर्क में हैं। कुछ नेताओं ने तो यहां तक कहा है कि लोकसभा में उद्धव गुट के अधिकांश सांसद जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं।
इसी संभावना ने शिवसेना (यूबीटी) की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
लोकसभा में क्या बदल सकता है समीकरण?
वर्तमान में उद्धव ठाकरे गुट के पास लोकसभा में 9 सांसद हैं। यदि इनमें से कुछ सांसद भी पाला बदलते हैं तो इसका सीधा असर महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर पड़ सकता है।
एनडीए पहले से ही अपने सहयोगियों के साथ मजबूत स्थिति में है। यदि उद्धव गुट में टूट होती है तो लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत और बढ़ सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति का असर आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।
शिंदे बनाम उद्धव की लड़ाई फिर चर्चा में
2022 में शिवसेना के ऐतिहासिक विभाजन के बाद से ही उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच राजनीतिक संघर्ष जारी है। विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनाव तक दोनों गुट लगातार अपनी ताकत साबित करने की कोशिश करते रहे हैं।
अब सांसदों के संभावित टूटने की खबरों ने इस राजनीतिक लड़ाई को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
क्या महाराष्ट्र में फिर होगा बड़ा राजनीतिक धमाका?
भाऊसाहेब वाकचौरे और अन्य सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में एक और बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है।
यदि ऑपरेशन टाइगर की चर्चाएं सच साबित होती हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं शिंदे गुट के लिए यह राजनीतिक मजबूती का बड़ा अवसर बन सकता है।