नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा और ऑटोमोबाइल नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन) के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस फैसले के साथ ही भारत में पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex Fuel Vehicles) का रास्ता साफ हो गया है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही E20 और हाल ही में लॉन्च किए गए E85 ईंधन को बढ़ावा दे रहा है। अब सरकार पेट्रोल पर निर्भरता कम कर घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधन (Bio Fuel) को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
नागपुर सम्मेलन में गडकरी का बड़ा ऐलान
नागपुर में आयोजित शुगर, इथेनॉल एंड बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस में नितिन गडकरी ने घोषणा की कि E100 ईंधन के उपयोग से संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले डेढ़ से दो महीनों में देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां E100 कंपैटिबल वाहन लॉन्च कर सकती हैं।
गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के समर्थक रहे हैं और उनका मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी तथा किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
क्या होता है E100 Fuel?
E100 ईंधन को आमतौर पर 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन कहा जाता है, हालांकि तकनीकी रूप से इसमें लगभग 93 से 95 प्रतिशत इथेनॉल होता है। शेष हिस्सा पेट्रोल और अन्य एडिटिव्स का होता है ताकि कम तापमान में इंजन आसानी से स्टार्ट हो सके।
इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसलिए इसे नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है।
कौन-कौन सी कंपनियां ला सकती हैं नई गाड़ियां?
सरकार की मंजूरी के बाद कई कंपनियां अपने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में हैं।
मारुति सुजुकी पहले ही अपनी फ्लेक्स-फ्यूल WagonR का प्रदर्शन कर चुकी है। वहीं हीरो मोटोकॉर्प ने इथेनॉल से चलने वाली मोटरसाइकिल का प्रोटोटाइप पेश किया था।
गडकरी के अनुसार टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी जैसी बड़ी कंपनियां जल्द ही E100 आधारित वाहन बाजार में उतार सकती हैं। इससे भारतीय ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल के अलावा एक नया विकल्प मिलेगा।

मौजूदा गाड़ियों में नहीं चलेगा E100
हालांकि E100 ईंधन को मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वर्तमान पेट्रोल कारों में इसे इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेक्स-फ्यूल इंजन में अलग तरह की कैलिब्रेशन, फ्यूल पाइपलाइन, इंजेक्शन सिस्टम और इंजन मैनेजमेंट तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसलिए E100 के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन ही इस ईंधन पर चल पाएंगे।
माइलेज पर पड़ सकता है असर
इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इसका सीधा असर वाहन के माइलेज पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि E100 वाहन समान दूरी तय करने के लिए पेट्रोल की तुलना में अधिक ईंधन की खपत कर सकते हैं। हालांकि यदि इथेनॉल की कीमत पेट्रोल से कम रखी जाती है तो उपभोक्ताओं को कुल लागत में राहत मिल सकती है।
सबसे बड़ी चुनौती होगी इंफ्रास्ट्रक्चर
E100 की सफलता केवल वाहन लॉन्च होने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इसके लिए देशभर में मजबूत वितरण नेटवर्क भी विकसित करना होगा।
तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर अलग स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और डिस्पेंसर लगाने होंगे। इसके अलावा इथेनॉल उत्पादन और सप्लाई चेन को भी बड़े स्तर पर विस्तार देना होगा।
किसानों और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि E100 कार्यक्रम का सबसे बड़ा फायदा भारतीय किसानों को मिलेगा। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन बढ़ने पर किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
इसके अलावा भारत हर साल कच्चे तेल के आयात पर अरबों डॉलर खर्च करता है। यदि इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग बढ़ता है तो विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और देश का आयात बिल घट सकता है।
हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम
पर्यावरण विशेषज्ञ E100 को स्वच्छ ईंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी और भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के करीब पहुंच सकेगा।
सरकार का यह फैसला आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिशा बदल सकता है और देश को वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन प्रणाली की ओर तेजी से ले जा सकता है।