महाराष्ट्र में फिर टूटी ठाकरे की शिवसेना! 9 में से 6 सांसद बागी, संजय राउत का बड़ा आरोप- ‘50 करोड़ का ऑफर’

नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी को चार साल में दूसरी बार बड़े स्तर पर टूट का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने बुधवार सुबह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर अपने समूह को मान्यता देने की मांग की है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इस घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए 50-50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों तक 15-15 करोड़ रुपये पहुंचाए गए और उन्हें चार्टर्ड विमानों के जरिए दिल्ली लाया गया।

राउत ने कहा कि पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बागी सांसदों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया, जिस पर बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी भाषा में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं।

उद्धव ठाकरे की बढ़ी मुश्किलें

इस संकट के बीच उद्धव ठाकरे अपने सांसदों को मनाने और संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों से संपर्क साधने में जुटा है, लेकिन कई सांसदों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी को देखते हुए पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।

पार्टी ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे, उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

संजय दीना पाटिल ने किया इनकार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सांसद संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वे उद्धव ठाकरे के साथ हैं और शिवसेना (UBT) नहीं छोड़ रहे हैं। पाटिल ने कहा कि उनका नाम किसी भी बागी सूची में शामिल नहीं है और वे पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर से की मुलाकात

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संभावित बागी गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की। सावंत ने अपने पत्र में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के नेता, व्हिप और विधायी अधिकार पार्टी संगठन से आते हैं, न कि केवल विधायक या सांसद समूह से।

वहीं अनिल देसाई ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर समय रहते फैसला दे देता तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

2022 की बगावत की याद हुई ताजा

महाराष्ट्र की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब शिवसेना में इतनी बड़ी टूट देखने को मिली हो। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायक शिवसेना से अलग हो गए थे। उस बगावत के कारण उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई थी और बाद में चुनाव आयोग तथा विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद शिंदे गुट को असली शिवसेना और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह मिल गया था।

अब सांसदों के स्तर पर हुई इस नई बगावत ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टूट आधिकारिक रूप से मान्य हो जाती है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

शिवसेना (UBT) में सांसदों की संभावित बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। एक तरफ उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर शिंदे गुट अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष और कानूनी प्रक्रियाओं के फैसले इस पूरे राजनीतिक संकट की दिशा तय करेंगे।

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