अयोध्या: स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रवार का दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे से पहले सामने आई एक जानकारी ने पूरे मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का अनुरोध किया है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़े प्रोटोकॉल पत्र में यह उल्लेख किया गया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर विवाद और जांच लगातार सुर्खियों में है।
चंपत राय की भूमिका पर बढ़ी चर्चा
राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय को सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में माना जाता है। मंदिर निर्माण से लेकर प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं तक उनकी अहम भूमिका रही है। अब तक मंदिर में हुए लगभग सभी बड़े कार्यक्रमों और वीआईपी दौरों में उनकी मौजूदगी दर्ज रही है।
ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में उनके शामिल न होने की चर्चा ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
चौथे दिन भी जारी रही SIT की जांच
गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) लगातार चौथे दिन राम मंदिर परिसर पहुंचा। जांच टीम सुबह से ही मंदिर प्रशासन और चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा में जुटी रही।
सूत्रों के अनुसार, टीम ने चढ़ावा राशि की गिनती, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की संभावना जताई गई।
जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, गिनती एजेंसियों के दस्तावेज और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर रही हैं।

अब तक 2 करोड़ रुपये की बरामदगी का दावा
मामले में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणेश और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन लोगों की निशानदेही पर लगभग 2 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई है। ये सभी किसी न किसी रूप में चढ़ावा राशि की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में शामिल थे। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। अयोध्या पहुंचे उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी में बड़े लोग शामिल हैं और मामले की उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश से जांच कराई जानी चाहिए।
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और जांच रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को उछालने का आरोप भी लगाया।
इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पूर्व मंत्री पवन पांडेय भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। पवन पांडेय ने कथित रूप से करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी का दावा किया था।
राम मंदिर में CEO नियुक्ति की चर्चा
जांच के बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि इस पद पर किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और दान प्रबंधन को और मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और सरकार तथा ट्रस्ट के बीच मंथन जारी है।
आगे क्या?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा और SIT की जांच रिपोर्ट आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ करने में लगी हुई हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजरें जांच के अंतिम निष्कर्ष और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से पहले चंपत राय को लेकर सामने आई जानकारी ने विवाद को और गहरा कर दिया है। हालांकि मामले की सच्चाई केवल जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल SIT की कार्रवाई और संभावित प्रशासनिक बदलाव पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बने हुए हैं।