वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में उस समय हड़कंप मच गया जब बनारस कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। धमकी भरा ई-मेल सीधे जिला जज के आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजा गया था, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
सूत्रों के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे जिला जज के ई-मेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में कथित तौर पर आतंकवादी संगठन के नाम से कचहरी परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। सुबह यह जानकारी मिलते ही जिला जज ने तत्काल बार पदाधिकारियों को अपने चैंबर में बुलाकर स्थिति से अवगत कराया।
धमकी को गंभीरता से लेते हुए कचहरी परिसर को एहतियातन खाली कराया गया। सभी मामलों में अगली तारीखें देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों से परिसर खाली करने का अनुरोध किया गया, जिसके बाद न्यायिक कार्य अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए।

सेंट्रल बार अध्यक्ष प्रेमप्रकाश सिंह गौतम ने बताया कि जिला जज ने दोनों बार के अध्यक्ष और महामंत्री को बुलाकर ई-मेल की जानकारी दी। सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
धमकी की सूचना मिलते ही डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार और कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की मदद से पूरे परिसर में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। कोर्ट रूम, अधिवक्ता चैंबर और परिसर के हर हिस्से की बारीकी से तलाशी ली गई।
उधर, साइबर सेल को ई-मेल की जांच सौंपी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि ई-मेल किस सर्वर से भेजा गया और उसका आईपी एड्रेस क्या है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही भेजने वाले की पहचान की जाएगी।
फिलहाल जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया है। पुलिस ने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।
निष्कर्ष:
बनारस कचहरी को मिली बम धमकी ने एक बार फिर न्यायिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि समय रहते प्रशासन की सतर्कता से किसी भी अनहोनी की आशंका को टाल दिया गया, लेकिन अब सबकी नजर साइबर जांच के नतीजों पर टिकी है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि धमकी महज शरारत थी या इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र।