नई दिल्ली। यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए Indian Railways ने ट्रेनों में साफ-सफाई के लिए बड़ी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब चलती ट्रेन में हर 1 से 2 घंटे के भीतर कोच, बाथरूम और डस्टबिन की सफाई की जाएगी।
केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि पहले चरण में यह सुविधा लंबी दूरी की 80 ट्रेनों में अगले छह महीनों के भीतर लागू की जाएगी।
🧹 क्या है नई ‘Passenger First’ व्यवस्था?
रेलवे ने ‘52 सप्ताह, 52 रिफॉर्म’ का संकल्प लिया है। इसके तहत हर सप्ताह एक बड़ा सुधार लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत:
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आरक्षित और अनारक्षित दोनों श्रेणियों के कोचों की यात्रा के दौरान सफाई होगी।
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बाथरूम, डस्टबिन और फर्श की नियमित अंतराल पर सफाई अनिवार्य होगी।
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छोटी-मोटी इलेक्ट्रिक मरम्मत जैसे लाइट या स्विच खराब होने की शिकायत भी ट्रेन में ही दूर की जाएगी।
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हर जोन से 5-6 ट्रेनों को पहले चरण में चुना जाएगा।

📱 शिकायत का आसान तरीका
अगर सफाई समय पर नहीं होती या ठीक से नहीं की जाती, तो यात्री Rail One ऐप या रेलवे के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फोटो अपलोड कर शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे जवाबदेही तय होगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
🤖 AI कैमरों से निगरानी
रेल मंत्री ने बताया कि सफाई की निगरानी अब AI कैमरों के जरिए की जाएगी। इससे काम की गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
🔄 पुराने सिस्टम से क्या अलग?
पहले लिनेन सप्लाई, बाथरूम सफाई और कोच सफाई के लिए अलग-अलग वेंडर होते थे। इससे जिम्मेदारी तय करने में दिक्कत आती थी।
अब:
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एक ही वेंडर को पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी।
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पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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जवाबदेही तय होगी और मॉनिटरिंग मजबूत होगी।
🚉 यात्रियों को क्या होगा फायदा?
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लंबी दूरी की यात्रा में साफ-सुथरा माहौल
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बदबू और गंदगी से राहत
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त्वरित शिकायत समाधान
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बेहतर हाइजीन और आरामदायक सफर
रेलवे का मानना है कि यह कदम यात्रियों के अनुभव को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
Indian Railways की यह नई ‘Passenger First’ पहल यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। हर 1-2 घंटे में सफाई और AI निगरानी जैसी व्यवस्था से ट्रेनों में स्वच्छता का स्तर बेहतर होने की उम्मीद है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पहले चरण की 80 ट्रेनों में यह प्रयोग कितना सफल रहता है और कब इसे देशभर की अन्य ट्रेनों में लागू किया जाता है। 🚆