राजस्थान डॉक्टर 50 लाख बॉण्ड पर विधानसभा में बड़ा प्रस्ताव
राजस्थान: डॉक्टर 50 लाख बॉण्ड को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की भारी कमी का मुद्दा उठा। बीजेपी विधायकों ने सरकार से मांग की कि नए नियुक्त डॉक्टरों से 50 लाख रुपये का बॉण्ड भरवाया जाए और उन्हें कम से कम 5 साल तक गांवों में सेवा देना अनिवार्य किया जाए।
कालीचरण सराफ ने उठाया मुद्दा
जयपुर की मालवीय नगर सीट से विधायक और पूर्व मंत्री Kalicharan Saraf ने कहा कि राज्य में लगभग 3000 सरकारी अस्पताल हैं, जिनमें से करीब 2500 छोटे जिलों और दूरदराज के गांवों में स्थित हैं।
उन्होंने बताया कि करीब 75 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मी गांवों में जाना नहीं चाहते। चाहे डॉक्टर हों, नर्सिंग स्टाफ या पैरामेडिकल कर्मचारी — राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर वे शहरों में डेपुटेशन ले लेते हैं।
सराफ ने कहा कि इस वजह से ग्रामीण मरीजों को इलाज के लिए जिला या संभाग मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।
50 लाख का बॉण्ड और 5 साल गांव में सेवा का सुझाव
सराफ ने स्पष्ट कहा:
“नए डॉक्टरों की नियुक्ति हो तो उनसे कम-से-कम 50 लाख रुपये का बॉण्ड भरवाया जाए। यह शर्त रखी जाए कि पहले 5 साल उनकी पोस्टिंग दूरदराज के गांवों में होगी।”
उन्होंने ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने और शहरी भत्ता बंद करने का भी सुझाव दिया।
ग्रामीण भत्ता और बच्चों की शिक्षा पर जोर
सराफ ने कहा कि शहरों में काम करने वाले डॉक्टरों को मिलने वाला शहरी भत्ता बंद किया जाए और उसकी जगह ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को विशेष भत्ता दिया जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गांवों में सेवा दे रहे डॉक्टरों के बच्चों को शहरों के अच्छे स्कूलों में प्राथमिकता से प्रवेश दिया जाए।
अनीता भदेल ने किया समर्थन
अजमेर दक्षिण से बीजेपी विधायक Anita Bhadel ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
भदेल ने सुझाव दिया कि डॉक्टरों को गांवों में सेवा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पीजी परीक्षा में अतिरिक्त अंक देने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

मातृ और शिशु मृत्यु दर पर चिंता
विधायकों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ और शिशु मृत्यु दर शहरों की तुलना में अधिक है। यदि गांवों में पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे तो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भामाशाहों के सहयोग से अच्छी डिस्पेंसरी और भवन तो बनाए जा सकते हैं, लेकिन बिना डॉक्टरों के चिकित्सा सेवाएं प्रभावी नहीं हो सकतीं।
सरकार की अगली रणनीति पर नजर
विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद अब सभी की नजर Bhajanlal Sharma सरकार की अगली रणनीति पर टिकी है। यदि 50 लाख बॉण्ड और 5 साल ग्रामीण सेवा की नीति लागू होती है, तो यह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।
राजस्थान में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर विधानसभा में उठी यह मांग आने वाले दिनों में बड़ी नीति बदलाव का कारण बन सकती है। 50 लाख रुपये के बॉण्ड और अनिवार्य ग्रामीण सेवा का प्रस्ताव डॉक्टरों की कमी को दूर करने की दिशा में एक सख्त लेकिन महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
अब देखना होगा कि सरकार इस सुझाव को किस रूप में स्वीकार करती है और क्या इससे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल पाएगी।