हाईकोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी; इस महीने 5वां ई-मेल, तलाशी में कुछ नहीं मिला

जयपुर: में स्थित Rajasthan High Court को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। बुधवार सुबह हाईकोर्ट प्रशासन को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था—“हाईकोर्ट को 11 बजे तक खाली कर दो। दोपहर 1:30 बजे हाईकोर्ट परिसर में 18 बम धमाके होंगे।”

धमकी भरा यह मेल जयपुर पीठ के जजों और स्टाफ के नाम भेजा गया था। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हालांकि, व्यापक तलाशी के बाद कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई।

यह इस महीने पांचवीं बार है जब जयपुर हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।


सुबह-सुबह मिला धमकी भरा मेल

सूत्रों के अनुसार, धमकी भरा ई-मेल सुबह अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्राप्त हुआ। मेल में समय का स्पष्ट उल्लेख था—1:30 बजे 18 बम धमाके। साथ ही कोर्ट परिसर को 11 बजे तक खाली कराने की चेतावनी दी गई थी।

मेल की भाषा और संरचना से यह प्रतीत होता है कि भेजने वाले ने जानबूझकर भय का माहौल बनाने की कोशिश की। मेल मिलते ही हाईकोर्ट प्रशासन ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।


तुरंत हरकत में आई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां

सूचना मिलते ही जयपुर पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमें हाईकोर्ट परिसर पहुंच गईं। कोर्ट रूम, जजों के चैंबर, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग एरिया और सार्वजनिक प्रवेश द्वारों की बारीकी से जांच की गई।

सुरक्षा एजेंसियों ने मेटल डिटेक्टर और विस्फोटक पहचान उपकरणों की मदद से हर कोने को खंगाला। करीब दो घंटे तक चली तलाशी के बाद यह स्पष्ट हुआ कि परिसर में कोई भी संदिग्ध वस्तु मौजूद नहीं है।


सुनवाई पर नहीं पड़ा असर

हालांकि धमकी गंभीर थी, लेकिन प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तलाशी की प्रक्रिया अदालत की नियमित कार्यवाही शुरू होने से पहले ही पूरी कर ली। इसके चलते सुबह 10:30 बजे से सभी कोर्ट निर्धारित समय पर शुरू हो गए।

कानूनी कार्यवाही पर इस बार कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। वकीलों और वादकारियों की एंट्री के दौरान अतिरिक्त जांच जरूर की गई, लेकिन कामकाज सामान्य रहा।


इस महीने पांचवीं बार धमकी

फरवरी महीने में यह पांचवीं बार है जब जयपुर हाईकोर्ट को धमकी भरा ई-मेल मिला है। इससे पहले 6 फरवरी को पहली बार इस महीने धमकी आई थी। इसके बाद 17, 19 और 20 फरवरी को भी इसी तरह के मेल प्राप्त हुए।

पिछले साल 31 अक्टूबर से लेकर अब तक कुल 11 बार हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। हर बार तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला और धमकी फर्जी साबित हुई।

फिर भी हर बार सुरक्षा व्यवस्था में भारी संसाधन लगाने पड़ते हैं, जिससे प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज पर दबाव पड़ता है।


सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी

लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पहचान पत्र की जांच सख्ती से की जा रही है और वाहनों की एंट्री सीमित कर दी गई है।

हाईकोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ा दी गई है। साइबर सेल को ई-मेल के स्रोत का पता लगाने का काम सौंपा गया है।


साइबर जांच में जुटी एजेंसियां

धमकी भरे ई-मेल की ट्रेसिंग के लिए साइबर विशेषज्ञों की टीम सक्रिय हो गई है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मेल किस आईपी एड्रेस से भेजा गया और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है या कोई शरारती तत्व।

पिछली धमकियों में भी जांच एजेंसियों ने कई संदिग्ध खातों की पड़ताल की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस गिरफ्तारी सामने नहीं आई है। पुलिस का मानना है कि मेल भेजने वाला व्यक्ति तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा है।


फर्जी धमकियों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

बार-बार मिल रही बम धमकियों का एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। कोर्ट परिसर में कार्यरत कर्मचारी, वकील और आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है।

हालांकि अब तक सभी धमकियां फर्जी साबित हुई हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले सकतीं। हर धमकी के बाद विस्तृत तलाशी और सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाना अनिवार्य हो जाता है।


प्रशासन की अपील

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हर संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि फर्जी धमकी देना गंभीर अपराध है और इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


न्याय व्यवस्था को चुनौती?

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार निशाना बनाने की कोशिश न्याय व्यवस्था को अस्थिर करने की साजिश हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी आतंकी संगठन या संगठित नेटवर्क का नाम सामने नहीं आया है।

फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि आखिर कौन और क्यों लगातार हाईकोर्ट को निशाना बना रहा है?


आगे क्या?

साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं। ई-मेल सर्वर, आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण किया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि जल्द ही धमकी भेजने वाले तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं हाईकोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने का निर्णय लिया है।

जयपुर हाईकोर्ट को मिली यह ताजा बम धमकी भले ही फर्जी निकली हो, लेकिन इससे सुरक्षा तंत्र की गंभीरता और सतर्कता स्पष्ट होती है। लगातार मिल रही धमकियां न्यायिक व्यवस्था के लिए चुनौती हैं।

प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई कर न केवल संभावित खतरे को टाला, बल्कि अदालत की कार्यवाही भी प्रभावित नहीं होने दी। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—इन धमकियों के पीछे छिपे चेहरे को बेनकाब करना।

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