लखनऊ: के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में सोमवार का दिन खास बन गया, जब टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर Yuvraj Singh ने बच्चों के साथ मैदान पर समय बिताया। राजधानी के Ekana Cricket Stadium में आयोजित इस कार्यक्रम में युवराज ने न सिर्फ बच्चों के साथ खेला, बल्कि उन्हें क्रिकेट के बारीक गुर भी सिखाए।
मैदान पर जब बच्चों ने बॉलिंग की तो युवराज ने बैटिंग की। इसके बाद उन्होंने खुद कैचिंग ड्रिल कराई। इसी दौरान एक लड़की ने शानदार कैच पकड़ा, तो युवराज ने तुरंत उसकी तारीफ करते हुए कहा—“बहुत अच्छा कैच पकड़ा है… लड़कों देख लो, कुछ सीख लो।” उनके इस मजाकिया लेकिन प्रेरक अंदाज ने माहौल को उत्साह से भर दिया।
हर गेंद पर तैयार रहो
युवराज ने खिलाड़ियों को समझाया कि क्रिकेट में हर गेंद अहम होती है। “आप सभी को हर बॉल पर तैयार रहना चाहिए। मैदान पर कभी भी लूज होकर खड़े नहीं होना चाहिए। लूज रहोगे तो कैच छूट जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि कैच पकड़ते समय हाथ रिलैक्स रखें और गेंद को सॉफ्ट टच के साथ लें।
बच्चों ने उनकी निगरानी में बॉलिंग, बैटिंग और फील्डिंग की प्रैक्टिस की। युवराज ने स्पिन और पेस अटैक के बीच अंतर समझाते हुए बताया कि सही लाइन-लेंथ और बॉडी पॉस्चर कितना जरूरी है। उन्होंने यह भी समझाया कि गेंद को कब और कहां से रिलीज करना चाहिए।
चौके-छक्कों का फॉर्मूला
युवराज सिंह ने बल्लेबाजों को बड़े शॉट लगाने के टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि शॉट खेलते समय बैलेंस और टाइमिंग सबसे अहम है। “बड़ी हिट ताकत से नहीं, टाइमिंग से लगती है,” उन्होंने कहा। खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में कई शॉट्स खेले और फील्डिंग पोजिशनिंग भी सीखी।
‘यूपी में हैं, तो हिंदी में बात करेंगे’
एक सवाल के जवाब में युवराज ने मुस्कुराते हुए कहा, “पहली बात, मैं तीन बार का वर्ल्ड कप विनर हूं। यूपी में हैं, तो हिंदी में बात करेंगे।” उन्होंने कहा कि बच्चों को सपोर्ट और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। कई बार प्रतिभाशाली बच्चे संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं।

यूपी में सुविधाओं की कमी पर बोले
युवराज ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में क्रिकेट की बड़ी सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी यहां से कई खिलाड़ी टीम इंडिया तक पहुंचे। उन्होंने इस बार की रणजी ट्रॉफी में Jammu and Kashmir cricket team के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि टैलेंट हर जगह है, बस उसे सही प्लेटफॉर्म चाहिए।
उन्होंने मौजूदा खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए Shubman Gill, Abhishek Sharma और Sachin Tendulkar का नाम लिया। युवराज ने बताया कि जब उन्हें करियर में दिक्कत आई थी, तो उन्होंने सचिन से बात की थी और चीजें साफ हुईं।
पहले बल्ले का दिलचस्प किस्सा
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए युवराज ने बताया कि उनका पहला बल्ला उनके पिता ने दिया था। “मैंने उस बैट से छक्का मारा, गेंद जाकर एक आदमी को लग गई। वह मुझे दौड़ाने लगा और मैं बैट छोड़कर भाग गया,” उन्होंने हंसते हुए कहा। यह किस्सा सुनकर बच्चे भी ठहाके लगाने लगे।
महिला डगआउट का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान युवराज ने महिला खिलाड़ियों के लिए बने नए डगआउट का उद्घाटन भी किया। कंटेनर में क्रिकेट महानायक Sachin Tendulkar की तस्वीर और लखनऊ के प्रसिद्ध Bara Imambara की पेंटिंग बनाई गई है।
इस अवसर पर बच्चों को क्रिकेट किट भी वितरित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रासरूट स्तर पर क्रिकेट को बढ़ावा देना था, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे भी अपने सपनों को साकार कर सकें।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में युवराज सिंह की मौजूदगी ने नन्हे खिलाड़ियों को नई ऊर्जा दी। उन्होंने सिर्फ तकनीकी टिप्स ही नहीं दिए, बल्कि आत्मविश्वास और सपनों को उड़ान देने का संदेश भी दिया। खासतौर पर लड़कियों की तारीफ कर उन्होंने यह साफ कर दिया कि क्रिकेट में जेंडर नहीं, टैलेंट मायने रखता है।