सोनू सूद ने मंदिर को भेंट किया ‘ऐरावत’: चेन्नई में लाइफ-साइज मैकेनिकल हाथी बना आस्था और दया का प्रतीक

बॉलीवुड अभिनेता: Sonu Sood एक बार फिर अपने सामाजिक कार्यों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपने बेटे अयान के साथ मिलकर चेन्नई के Shri Shakti Vinayagar Temple को एक खास तोहफा दिया है—लाइफ-साइज मैकेनिकल हाथी, जिसका नाम ‘ऐरावत’ रखा गया है।

यह रोबोटिक हाथी दिखने में बिल्कुल असली हाथी जैसा है और इसे धार्मिक उत्सवों व परंपराओं के दौरान इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि किसी जीवित हाथी को तकलीफ न हो। यह पहल पशु कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

PETA और PFCI के सहयोग से अनोखी भेंट

सोनू सूद ने यह मैकेनिकल हाथी PETA India और People for Cattle in India (PFCI) के साथ मिलकर मंदिर को भेंट किया है। मंदिर प्रशासन पहले ही यह निर्णय ले चुका था कि वे अपने धार्मिक आयोजनों में असली हाथियों को नहीं बुलाएंगे और न ही उन्हें स्थायी रूप से रखेंगे।

ऐसे में यह रोबोटिक हाथी परंपराओं को कायम रखते हुए पशु क्रूरता को रोकने का विकल्प बनकर सामने आया है। ‘ऐरावत’ नाम हिंदू पौराणिक कथाओं में इंद्र देव के दिव्य हाथी से प्रेरित है, जो शक्ति और भव्यता का प्रतीक माना जाता है।

सोनू सूद का संदेश

इस मौके पर सोनू सूद ने कहा, “मंदिर दया, भक्ति और इंसानियत की जगह होते हैं। जब भक्ति और दया साथ चलें, तो भगवान और भी ज्यादा चमकते हैं। मैं खुश हूं कि हमने यह मैकेनिकल हाथी दिया है, ताकि परंपराएं चलती रहें और किसी जीव को दुख न पहुंचे। यह भक्तों के लिए आशीर्वाद और हाथियों के लिए आजादी है।”

कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद कर चुके सोनू सूद शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किल ट्रेनिंग जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहे हैं। उनकी यह नई पहल पशु अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी देती है।

अयान सूद को है गर्व

सोनू सूद के बेटे अयान सूद भी इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल रहे। अयान ने कहा, “मुझे इस मैकेनिकल हाथी को मंदिर को देने में शामिल होने पर बहुत गर्व है। इससे हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पूजा-पाठ सुरक्षित और दयालु तरीके से हो। असली हाथी अपने जंगल में अपने परिवार के साथ खुशी से रह सकें।”

युवा पीढ़ी के इस जुड़ाव को पशु कल्याण संगठनों ने सराहा है। उनका मानना है कि जब नई पीढ़ी ऐसे मुद्दों पर संवेदनशील होगी, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से आएगा।

क्यों जरूरी है यह पहल?

भारत के कई हिस्सों में धार्मिक आयोजनों और जुलूसों में हाथियों का उपयोग किया जाता है। हालांकि, पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि बंदी अवस्था में हाथियों को शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़ते हैं।

मैकेनिकल हाथी इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान बन सकता है। यह पारंपरिक रीतियों का सम्मान करते हुए पशुओं को प्राकृतिक वातावरण में रहने की आजादी देता है। चेन्नई के इस मंदिर का फैसला अन्य मंदिरों और संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

भक्तों की प्रतिक्रिया

मंदिर आने वाले भक्तों ने इस पहल का स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि परंपरा का मूल उद्देश्य आस्था और भक्ति है, न कि किसी जीव को कष्ट देना। रोबोटिक हाथी देखने में भव्य है और धार्मिक कार्यक्रमों में वही प्रतीकात्मक महत्व निभा सकता है।

सोनू सूद और उनके बेटे अयान द्वारा चेन्नई के श्री शक्ति विनयगर मंदिर को भेंट किया गया मैकेनिकल हाथी ‘ऐरावत’ आस्था और दया के संगम का प्रतीक बन गया है। यह पहल दिखाती है कि परंपराओं को निभाते हुए भी पशु कल्याण और करुणा को प्राथमिकता दी जा सकती है। यदि अन्य धार्मिक संस्थान भी इस मॉडल को अपनाएं, तो यह देशभर में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

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