जयपुर। देशभर में बढ़ती मानव तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसी दिशा में राष्ट्रीय महिला आयोग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया गया है। इस पहल के तहत भारतीय रेलवे के माध्यम से होने वाली संभावित मानव तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
इसी कड़ी में सोमवार को जयपुर मंडल में एक ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय से आयोजित हुई, जिसमें उत्तर पश्चिम रेलवे के विभिन्न मंडलों से रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी और कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।
कार्यक्रम में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के जरिए होने वाली संभावित मानव तस्करी की घटनाओं को पहचानने और रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
रेलवे नेटवर्क का दुरुपयोग कर सकते हैं तस्कर
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है। प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेनों के माध्यम से यात्रा करते हैं। ऐसे में कई बार मानव तस्कर इस विशाल नेटवर्क का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं और बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का प्रयास करते हैं।
इसी वजह से रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचाना जा सके और संभावित पीड़ितों को बचाया जा सके।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने जताई चिंता
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विजया के. राहटकर, जो कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष हैं, ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संवेदनशील अपराध है। इसे रोकने के लिए केवल एक संस्था नहीं बल्कि सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग और रेलवे सुरक्षा बल के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करना और जागरूकता बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि आयोग देशभर में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। रेलवे नेटवर्क में सुरक्षा बढ़ाने से मानव तस्करी की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
छोटे स्टेशनों पर भी बढ़ेगी निगरानी
कार्यक्रम में ज्योति कुमार सतीजा, जो उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर हैं, ने कहा कि बड़े शहरों के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर तो सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहती है, लेकिन आसपास के छोटे स्टेशनों पर भी समान रूप से निगरानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार तस्कर भीड़भाड़ से बचने के लिए छोटे और कम भीड़ वाले स्टेशनों का उपयोग करते हैं। ऐसे स्थानों पर सतर्कता बढ़ाने से कई संभावित घटनाओं को रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान उत्तर पश्चिम रेलवे क्षेत्र में रेलवे सुरक्षा बल ने कई बच्चों और महिलाओं को तस्करी के प्रयासों से बचाने में सफलता प्राप्त की है।
एनजीओ ने दी जागरूकता की जानकारी
कार्यशाला में शक्ति वाहिनी नामक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि निशिकांत ने भी भाग लिया। उन्होंने मानव तस्करी के विभिन्न तरीकों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में तस्कर गरीब या कमजोर वर्ग के लोगों को झांसा देकर या नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। इसलिए समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
बड़ी संख्या में जुड़े अधिकारी और कर्मचारी
इस ऑनलाइन कार्यशाला में वी.सी. मल्लिकार्जुना (उप महानिरीक्षक), ओंकार सिंह (वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, जयपुर मंडल) सहित रेलवे सुरक्षा बल के कई अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा आरपीएफ के 100 से अधिक अधिकारी और बल सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों को मानव तस्करी की पहचान और रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।