वॉशिंगटन डीसी: से सामने आ रही खबरों के मुताबिक ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं।
शुरुआती दिनों में जहां इस युद्ध को अमेरिका के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा था, वहीं 17 दिन बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक संकट का केंद्र
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति को बाधित कर दिया है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है और तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
NATO देशों ने किया साफ इनकार
अमेरिका ने अपने सहयोगी NATO देशों से इस रास्ते को खुलवाने में मदद मांगी थी।
लेकिन जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस और अन्य देशों ने साफ कर दिया कि वे इस सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होंगे।
जर्मनी का सख्त रुख
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि यह यूरोप की लड़ाई नहीं है और इसमें शामिल होने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
वहीं रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने अमेरिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अमेरिकी नौसेना खुद सक्षम है, तो यूरोप के कुछ जहाज क्या फर्क डालेंगे।

ब्रिटेन ने भी बनाई दूरी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस युद्ध में नहीं फंसेगा।
उन्होंने माना कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सामूहिक और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।
इटली और अन्य देशों का रुख
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इस संकट का समाधान बातचीत से ही संभव है।
ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है।
यूरोपीय यूनियन ने भी ठुकराई अपील
यूरोपीय यूनियन ने भी ट्रम्प की अपील को खारिज कर दिया।
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि फिलहाल किसी सैन्य मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
ट्रम्प का सहयोगियों पर दबाव
डोनाल्ड ट्रम्प लगातार अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर NATO देश मदद नहीं करते, तो गठबंधन का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने खासतौर पर ब्रिटेन से नाराजगी जताई, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि वह समर्थन करेगा।
युद्ध के उद्देश्य पर सवाल
यूरोपीय देशों ने इस युद्ध के मकसद को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल की रणनीति स्पष्ट नहीं है और बिना स्पष्ट लक्ष्य के किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल होना उचित नहीं होगा।
वैश्विक असर और बढ़ता तनाव
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है।
इसके साथ ही दुबई जैसे क्षेत्रों में ड्रोन हमलों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।