उत्तर प्रदेश: की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। गोंडा जिले के तरबगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी कृष्ण नारायण तिवारी उर्फ केटी तिवारी ने पार्टी से किनारा कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। खास बात यह है कि उन्होंने यह कदम 28 साल बाद उठाया है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में केटी तिवारी ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर सपा सांसद राम शिरोमणि वर्मा और वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी भी उपस्थित रहे।
पुराने रिश्तों की वापसी
केटी तिवारी का समाजवादी पार्टी से पुराना नाता रहा है। वे 1998 तक सपा में सक्रिय थे और सहकारिता प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। लेकिन 1998 में उन्होंने सपा छोड़कर बसपा का रुख किया था।
इसके बाद उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की और लगातार चुनावों में अपनी दावेदारी पेश करते रहे। हालांकि, पार्टी से टिकट न मिलने के कारण वे लंबे समय से नाराज चल रहे थे।
कांग्रेस से मोहभंग की वजह
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस में लगातार उपेक्षा और संगठन में सक्रिय भूमिका न मिल पाने से केटी तिवारी का मोहभंग हो गया था। उन्होंने कई बार पार्टी नेतृत्व से अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
आखिरकार उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर समाजवादी पार्टी में वापसी का फैसला किया। यह फैसला न सिर्फ उनके राजनीतिक करियर के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि तरबगंज क्षेत्र की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
2012 का चुनाव और बागी तेवर
केटी तिवारी का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा से टिकट मिलने वाला था, लेकिन अंतिम समय में टिकट कट गया। इसके बाद उन्होंने बागी रुख अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार राजनीति में सक्रिय बने रहे।

सपा के लिए क्यों अहम हैं तिवारी?
समाजवादी पार्टी के लिए केटी तिवारी की वापसी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तरबगंज क्षेत्र में उनका प्रभाव और संगठनात्मक अनुभव सपा को आगामी चुनावों में फायदा पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सपा अपने पुराने नेताओं को वापस जोड़कर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केटी तिवारी जैसे नेताओं की वापसी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
अखिलेश यादव की रणनीति
सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार पार्टी को मजबूत करने के लिए नए और पुराने दोनों तरह के नेताओं को जोड़ने में जुटे हैं। हाल के दिनों में कई नेताओं ने सपा का रुख किया है, जिससे पार्टी की राजनीतिक ताकत बढ़ती नजर आ रही है।
केटी तिवारी की वापसी भी इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है, जो आगामी चुनावों में सपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
स्थानीय राजनीति में असर
तरबगंज विधानसभा क्षेत्र में केटी तिवारी का अच्छा खासा जनाधार माना जाता है। ऐसे में उनके सपा में शामिल होने से कांग्रेस को नुकसान और सपा को सीधा फायदा मिल सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह बदलाव राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है, खासकर तब जब चुनावी माहौल बन रहा हो।