राजस्थान: की सांस्कृतिक राजधानी Jaipur में आज बूढ़ी गणगौर की शाही सवारी निकलेगी, जो परंपरा, आस्था और राजसी वैभव का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगी। Gangaur Festival के समापन अवसर पर आयोजित होने वाली यह सवारी हर साल की तरह इस बार भी भव्यता और उत्साह के साथ निकाली जा रही है।
शाम करीब 5:45 बजे सवारी City Palace Jaipur से रवाना होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तालकटोरा तक पहुंचेगी। इस दौरान पूरा शहर मानो रंग, संगीत और परंपरा में डूबा नजर आएगा।
सवारी से पहले ही उमड़ी भीड़
सवारी निकलने से पहले ही मार्ग के दोनों ओर भारी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटक भी इस खास आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
लोग अपने मोबाइल और कैमरों में इस भव्य आयोजन को कैद करते नजर आए। बाजारों में सुबह से ही चहल-पहल बढ़ गई थी और शाम होते-होते माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया।
लोक कलाकारों ने बांधा समां
इस शाही सवारी को और भी खास बनाने के लिए प्रदेशभर से लोक कलाकारों को आमंत्रित किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
इस दौरान कच्ची घोड़ी नृत्य, कालबेलिया, घूमर, चरी नृत्य, बहरूपिया कला, चंग और ढप की थाप, मशक वादन जैसे कई पारंपरिक प्रदर्शन किए गए। बीकानेर, बाड़मेर, किशनगढ़ और शेखावाटी के कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।
राजसी परंपरा की झलक
बूढ़ी गणगौर की सवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जयपुर की राजसी विरासत का भी प्रतीक है। इस दौरान पारंपरिक लवाजमा, सजे-धजे हाथी-घोड़े, बैंड-बाजे और शाही पालकी में विराजमान गणगौर माता की झलक देखने को मिलती है।
इस आयोजन में पूर्व राजपरिवार की परंपराओं की भी झलक देखने को मिलती है, जो इसे और भी खास बनाती है।
कल भी निकली थी सवारी
इससे पहले शनिवार को भी गणगौर माता की भव्य सवारी निकाली गई थी। इस दौरान जनानी ड्योढ़ी में विधिवत पूजा-अर्चना की गई और माता को पालकी में सवार कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया।
लोकगीतों जैसे “भंवर म्हाने पूजण दे गणगौर” और “खोल ऐ गणगौर माता खोल किवाड़ी” की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया।
सुरक्षा और व्यवस्था के खास इंतजाम
आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सवारी के मार्ग पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। पर्यटकों के लिए भी विशेष बैठने की व्यवस्था की गई है।
सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
बूढ़ी गणगौर की सवारी जयपुर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं और कला को भी जीवंत करती है।
हर साल हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और इसे देखने के लिए दूर-दूर से जयपुर पहुंचते हैं।
Jaipur में निकली बूढ़ी गणगौर की शाही सवारी एक बार फिर यह साबित करती है कि राजस्थान की परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और आकर्षक हैं। यह आयोजन संस्कृति, आस्था और पर्यटन का अनूठा संगम है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।