बल्ब ऑन होते ही शुरू होती थी जासूसी: राजकोट में डॉक्टर ने 3000 वीडियो बनाकर मांगे 25 लाख

गुजरात: के राजकोट से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल प्रोफेशन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक डॉक्टर ने दूसरे डॉक्टर के क्लिनिक में हिडन स्पाई कैमरा लगाकर करीब 3000 आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर लिए और बाद में उन्हीं वीडियो के आधार पर 25 लाख रुपये की उगाही की कोशिश की।

यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित डॉक्टर ने लगातार ब्लैकमेलिंग और मानसिक दबाव से परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

बल्ब होल्डर में छिपाया गया था कैमरा

जांच के अनुसार, आरोपी डॉक्टर कमल नांढा ने बेहद चालाकी से क्लिनिक के लेबर रूम में बल्ब होल्डर के अंदर एक स्पाई कैमरा फिट किया था।

इस कैमरे में इनबिल्ट मेमोरी कार्ड लगाया गया था, जो जैसे ही बल्ब का स्विच ऑन होता था, रिकॉर्डिंग शुरू कर देता था। इस तरह बिना किसी को भनक लगे लंबे समय तक वीडियो रिकॉर्डिंग होती रही।

3000 से ज्यादा वीडियो रिकॉर्ड

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने इस तरीके से 3000 से ज्यादा वीडियो रिकॉर्ड किए। इन वीडियो में पीड़ित डॉक्टर के निजी और संवेदनशील पल भी कैद हो गए थे, जिनमें एक महिला डॉक्टर के साथ उनके व्यक्तिगत दृश्य शामिल थे।

इन्हीं वीडियो को आधार बनाकर आरोपी ने पीड़ित से 25 लाख रुपये की मांग की। इतना ही नहीं, इस काम में कुछ स्थानीय पत्रकारों की भी संलिप्तता सामने आई है, जो उगाही में मदद कर रहे थे।

एकतरफा प्यार बना अपराध की वजह

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी डॉक्टर उस महिला डॉक्टर से एकतरफा प्यार करता था, जो वीडियो में दिखाई दे रही थीं। इसी कारण उसने यह साजिश रची और पीड़ित डॉक्टर को बदनाम करने के लिए यह कदम उठाया।

यह मामला सिर्फ ब्लैकमेलिंग ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भावनाओं के गलत दिशा में जाने का भी गंभीर उदाहरण है।

पुलिस ने किया खुलासा, कई आरोपी फरार

राजकोट पुलिस के डीसीपी (जोन-2) जगदीश बांगरवा के अनुसार, इस मामले में आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, उगाही में शामिल 11 कथित पत्रकार फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(E), 67 और 67(A) के तहत केस दर्ज किया गया है।

लंबे समय से कर रहा था परेशान

एसीपी चिंतन पटेल ने बताया कि आरोपी साल 2024 से ही पीड़ित डॉक्टर को लगातार परेशान कर रहा था। वह वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसों की मांग करता था।

आखिरकार मानसिक दबाव से तंग आकर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली, जिसके बाद इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ।

साइबर क्राइम का खतरनाक रूप

यह मामला दर्शाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह गंभीर अपराध में बदल सकता है। एक साधारण दिखने वाला बल्ब होल्डर भी जासूसी का माध्यम बन सकता है, यह घटना इसी का उदाहरण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देनी चाहिए।

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