मध्य-पूर्व: में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच भारत सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में नरेंद्र मोदी 27 मार्च को देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, जिसमें मौजूदा वैश्विक हालात और उनके भारत पर संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। प्रधानमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाला समय देश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
24 मार्च को राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि यदि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाला है” और इस चुनौती का सामना करने के लिए राज्यों और केंद्र को “टीम इंडिया” की तरह मिलकर काम करना होगा।
इससे पहले 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर एक हाई लेवल मीटिंग भी की थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की गई थी। इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री शामिल हुए थे।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार ने देश में ईंधन की कमी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि भारत के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त कच्चा तेल और ऑयल रिजर्व मौजूद है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही किल्लत की खबरों को “भ्रामक और जानबूझकर फैलाया गया प्रोपेगैंडा” बताया।
सरकार का कहना है कि इस तरह की अफवाहों का उद्देश्य लोगों में घबराहट पैदा करना और बाजार में ‘पैनिक बाइंग’ को बढ़ावा देना है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें।
इसी बीच 25 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मिडिल ईस्ट के हालात पर एक सर्वदलीय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और मौजूदा स्थिति पर अपने विचार साझा किए।
बैठक के दौरान एस जयशंकर ने एक बयान में कहा कि भारत किसी भी देश के लिए मध्यस्थता नहीं करता और न ही वह पाकिस्तान की तरह “दलाल देश” है। उनका यह बयान कांग्रेस नेता तारिक अनवर की टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका का जिक्र किया था।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र और संतुलित है, और देश अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिम्मेदार और संतुलित भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए तैयार रहना बेहद जरूरी है।
ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। यह न केवल देश की तैयारियों का संकेत है, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। आने वाले दिनों में इस बैठक के फैसले देश की रणनीति तय करेंगे।