नोएडा में ‘डर’ बनाम ‘विकास’ की जंग: मोदी के बयान पर अखिलेश का तीखा पलटवार, जेवर एयरपोर्ट बना सियासी अखाड़ा

ग्रेटर नोएडा: में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान राजनीति का पारा चढ़ गया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंच से समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तंज कसते हुए ‘नोएडा आने के डर’ का मुद्दा उठाया। उनके बयान के कुछ ही घंटों बाद सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखा पलटवार किया।

कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नोएडा आने से डरते थे। उन्होंने इसे अंधविश्वास और कुर्सी जाने के डर से जोड़ा। उन्होंने याद करते हुए कहा कि जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी और यूपी में सपा की सरकार थी, तब भी उन्हें यहां आने से रोकने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे यहां आकर इस “पवित्र धरती” का आशीर्वाद लेने पहुंचे।

पीएम ने यह भी आरोप लगाया कि 2004 से 2014 तक यह एयरपोर्ट परियोजना फाइलों में दबी रही और पूर्ववर्ती सरकारों ने इसके निर्माण में देरी की। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय 2003 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी, लेकिन बाद में इस पर ठोस काम नहीं हुआ।

पीएम के बयान के करीब तीन घंटे बाद अखिलेश यादव ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री प्रदेश में मेहमान बनकर आए हैं और उन्हें सम्मान के साथ विदा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिखने लगती है, तो व्यक्ति अपने पद और शब्दों पर नियंत्रण खो देता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उम्र और पद का सम्मान करना उनके संस्कार में शामिल है।

नोएडा को लेकर दशकों से एक राजनीतिक मिथक प्रचलित रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी सत्ता चली जाती है। इस मिथक की शुरुआत 1985 में मानी जाती है, जब Vir Bahadur Singh नोएडा गए और बाद में चुनाव हार गए। इसके बाद Narayan Dutt Tiwari सहित कई नेताओं के साथ ऐसा संयोग देखने को मिला।

समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav भी लंबे समय तक नोएडा जाने से बचते रहे। वर्ष 2011 में Mayawati नोएडा गईं और 2012 का चुनाव हार गईं, जिससे यह मिथक और मजबूत हो गया। हालांकि मौजूदा मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कई बार नोएडा जाकर इस धारणा को कमजोर किया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को “नए उत्तर प्रदेश” की नई पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि राज्य के विकास का प्रतीक है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली परियोजनाओं—यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी मिलकर इस क्षेत्र को एक बड़े बिजनेस और ट्रांजिट हब में बदल देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि एयरपोर्ट बनने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर और अलीगढ़ जैसे जिलों में तेजी से शहरीकरण होगा, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। किसानों को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि वे अपने उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेज सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलेगा। इसके अलावा छोटे और मझोले उद्योगों को भी नया बाजार मिलेगा।

एयरपोर्ट की विशेषताओं की बात करें तो इसके पहले चरण में लगभग 3300 एकड़ भूमि पर टर्मिनल और रनवे का निर्माण किया गया है। इस पर करीब 11,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह टर्मिनल हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। भविष्य में चार चरण पूरे होने के बाद इसे एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने की योजना है।

सूत्रों के अनुसार, यहां से फ्लाइट सेवाएं मई से शुरू हो सकती हैं। एयरपोर्ट की एक खास विशेषता यह भी है कि यहां यात्रियों को प्रवेश के बाद 20 मिनट से कम समय में बोर्डिंग की सुविधा मिल सकती है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन जहां विकास की बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है, वहीं इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी से साफ है कि विकास परियोजनाएं अब राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुकी हैं। नोएडा का पुराना मिथक भले ही अब कमजोर पड़ता दिख रहा हो, लेकिन इसका राजनीतिक उपयोग अभी भी जारी है।

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