अमेरिका: में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। शनिवार को पूरे देश में ‘नो किंग्स रैली’ के नाम से एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में अमेरिका के सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन अमेरिका के सभी 50 राज्यों में एक साथ आयोजित हुआ। करीब 3,300 अलग-अलग जगहों पर लोग सड़कों पर उतरे और ट्रम्प सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। आयोजकों का दावा है कि यह आंदोलन पिछले प्रदर्शनों की तुलना में और ज्यादा व्यापक और प्रभावशाली रहा।
ईरान युद्ध और महंगाई बना गुस्से की वजह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की कई नीतियों से नाराज हैं। खासतौर पर ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा महंगाई और सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी भी जनता के आक्रोश का बड़ा कारण बनी है।
कई जगहों पर लोगों ने पोस्टर और बैनर के जरिए ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मौजूदा प्रशासन को पद से हटाया जाए और नीतियों में बदलाव किया जाए।
बड़े शहरों में उमड़ा जनसैलाब
अमेरिका के कई बड़े शहरों में इस आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और मैनहट्टन इलाकों में भारी भीड़ जुटी, जिससे पुलिस को कई सड़कों को बंद करना पड़ा। वहीं शिकागो और मिनियापोलिस में भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
राजधानी वॉशिंगटन डीसी में लोग ‘लिंकन मेमोरियल’ और ‘नेशनल मॉल’ के आसपास इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। यहां का माहौल सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा।
कुछ जगह शांतिपूर्ण, कुछ जगह तनाव
हालांकि ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लॉस एंजिलिस और पोर्टलैंड में स्थिति थोड़ी बिगड़ गई। यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
पोर्टलैंड में कुछ प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) के दफ्तर के बाहर झंडा जलाकर विरोध जताया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

वैश्विक स्तर पर भी दिखा असर
इस आंदोलन का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। यूरोप के कई शहरों जैसे पेरिस, लंदन और लिस्बन में भी ट्रम्प विरोधी प्रदर्शन हुए। लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिकी नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
राजनीतिक नेताओं और सेलिब्रिटी का समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन में कई बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक चेहरों ने भी हिस्सा लिया। अमेरिकी नेता बर्नी सैंडर्स और सांसद इल्हान उमर ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और सरकार की नीतियों की आलोचना की।
इसके अलावा मशहूर सिंगर ब्रूस स्प्रिंग्सटीन समेत कई कलाकारों ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में परफॉर्म किया।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को ज्यादा गंभीरता से लेने से इनकार किया है। प्रशासन का कहना है कि ये विरोध प्रदर्शन केवल “भावनात्मक प्रतिक्रिया” हैं और आम जनता पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके फैसले देश को मजबूत बनाने के लिए हैं और वे किसी भी तरह से “राजा” की तरह शासन नहीं कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
‘नो किंग्स’ आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका में राजनीतिक असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। लाखों लोगों का सड़कों पर उतरना सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है। आने वाले समय में यह आंदोलन अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।