बिहार टेंडर घोटाले में बड़ा खुलासा! रिशुश्री गिरफ्तार, दिल्ली-सूरत समेत 4 शहरों में रेड; 68 करोड़ की संपत्ति जब्त

बिहार: में सरकारी टेंडर घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने चर्चित ठेकेदार रिशुश्री को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सरकारी टेंडरों में हेराफेरी, कमीशनखोरी और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच हुई इस गिरफ्तारी ने बिहार के कई सरकारी विभागों में हड़कंप मचा दिया है।

बुधवार को पटना के मीठापुर स्थित रिशुश्री के आवास पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान जांच एजेंसियों को करीब दो करोड़ रुपये के आभूषण, 61 जमीनों के डीड और कई अहम दस्तावेज मिले। इसके बाद SVU ने उसे हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की और गुरुवार तड़के औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

टेंडर मैनेज करने का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक रिशुश्री सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। आरोप है कि वह अधिकारियों को कमीशन देकर मनचाही कंपनियों को टेंडर दिलवाता था। नगर विकास विभाग, बुडको, भवन निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग समेत कई सरकारी संस्थाएं जांच के घेरे में आ गई हैं।

सूत्रों के अनुसार टेंडर पास कराने के बदले 8 से 9 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इस कमीशन की रकम नीचे से लेकर ऊपर तक कई अधिकारियों में बांटी जाती थी। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क में शामिल सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

अपनी कंपनियों के नाम पर उठाए सरकारी काम

जांच में यह भी सामने आया है कि रिशुश्री की छह से सात कंपनियां हैं। इन्हीं कंपनियों के जरिए वह खुद भी सरकारी प्रोजेक्ट हासिल करता था। आरोप है कि फर्जी बिल पास कराकर सरकारी योजनाओं में लागत बढ़ाकर दिखाई जाती थी और करोड़ों रुपये का खेल किया जाता था।

बताया जा रहा है कि सिस्टम को मैनेज करने के लिए छोटे कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक कमीशन बांटा जाता था। यही वजह है कि कई विभागों में बिना जांच के भुगतान भी पास हो जाते थे।

दिल्ली से सूरत तक जांच का दायरा

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। ईडी इससे पहले जून और नवंबर में रिशुश्री के कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

पटना के अलावा अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम और दिल्ली में भी जांच एजेंसियों ने तलाशी ली थी। इन छापों में कई अहम दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और संदिग्ध बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद हुए थे।

जांच एजेंसियों को कुछ ट्रैवल एजेंटों और रिश्तेदारों की भूमिका पर भी शक है। आरोप है कि अवैध पैसों का इस्तेमाल विदेश यात्राओं और आलीशान संपत्तियां खरीदने में किया गया।

68 करोड़ की संपत्ति पहले ही जब्त

ईडी ने अगस्त महीने में रिशुश्री और उसके परिवार से जुड़ी करीब 68.09 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इनमें जमीन, फ्लैट, व्यवसायिक संपत्तियां और बैंक खातों में जमा रकम शामिल थी।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी संपत्ति आखिर किस स्रोत से अर्जित की गई। कई लेनदेन संदिग्ध बताए जा रहे हैं और हवाला कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

विदेश यात्रा और अफसरों से संबंधों की जांच

सूत्रों के मुताबिक जांच में कुछ अधिकारियों को विदेश भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या सरकारी टेंडरों के बदले अफसरों को महंगे तोहफे, यात्राएं या अन्य सुविधाएं दी गई थीं।

डिजिटल दस्तावेजों और मोबाइल डेटा की जांच जारी है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

बिहार में बढ़ी राजनीतिक हलचल

टेंडर घोटाले की खबर सामने आने के बाद बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक ठेकेदार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

बिहार के सरकारी टेंडर घोटाले में रिशुश्री की गिरफ्तारी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की संपत्ति, टेंडर में कमीशनखोरी और अफसरों से सांठगांठ के आरोपों ने पूरे सिस्टम को कटघरे में ला खड़ा किया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आगे कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं।

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