उत्तराखंड: में चारधाम यात्रा 2026 से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा प्रस्तावित नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) में गैर-सनातन धर्म मानने वालों के प्रवेश को लेकर सख्ती के संकेत दिए गए हैं।
देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में प्रवेश के लिए नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसके तहत श्रद्धालुओं को अपनी आस्था को लेकर स्पष्ट घोषणा करनी पड़ सकती है।
इसी दौरान जब बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के संदर्भ में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यदि वे केदारनाथ धाम में प्रवेश करना चाहती हैं, तो उन्हें हलफनामा (एफिडेविट) देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी सनातन धर्म में आस्था है।
यह बयान सामने आते ही इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक तथा सामाजिक बहस शुरू हो गई है।
क्या हैं प्रस्तावित नए नियम?
BKTC द्वारा तैयार की जा रही SOP में तीन प्रमुख बदलावों की बात सामने आई है। पहला, गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना है। समिति का कहना है कि यह निर्णय पारंपरिक व्यवस्थाओं और धार्मिक मर्यादाओं के अध्ययन के बाद लिया जा रहा है।
दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि मंदिर परिसर के 50 से 60 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह नियम केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन और अन्य कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
तीसरा, धामों में फोटोग्राफी के लिए अलग से निर्धारित स्थान तय किए जाएंगे। श्रद्धालु केवल उन्हीं स्थानों पर फोटो खींच सकेंगे, जिससे मंदिर परिसर की पवित्रता और अनुशासन बना रहे।
सारा अली खान का कनेक्शन क्यों चर्चा में?
सारा अली खान कई बार केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए जा चुकी हैं। उनकी फिल्म “केदारनाथ” के बाद से उनका इस स्थान से विशेष जुड़ाव रहा है। वे अक्सर अपने आध्यात्मिक अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा करती रही हैं।
अब नई SOP लागू होने की स्थिति में उन्हें भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी, जो अन्य श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित की जाएगी। इसी वजह से उनका नाम इस बहस का केंद्र बन गया है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस मुद्दे पर कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जो अपने सामाजिक समावेश और परंपराओं के लिए जाना जाता है, वहां किसी की आस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि हलफनामा जरूरी किया जाता है, तो क्या यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि क्या अन्य धर्मों के नेता या सार्वजनिक जीवन के लोग भी इसी प्रक्रिया से गुजरेंगे।
यात्रा की तैयारियां और बजट
BKTC अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि चारधाम यात्रा 2026 के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में सुविधाओं के विकास के लिए कुल 121 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा तीर्थ पुरोहितों के लिए कल्याण कोष बनाने, मंदिर कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि और ऑनलाइन पूजा व्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे फैसले भी लिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष यात्रा के लिए पंजीकरण में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मात्र 11 दिनों में ही लगभग सवा 6 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
बढ़ता विवाद और संभावित असर
इस प्रस्तावित SOP ने धार्मिक स्वतंत्रता, आस्था और समानता जैसे मुद्दों पर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा का कदम मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे भेदभावपूर्ण भी बताया जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और मंदिर समिति इस विवाद को किस तरह संतुलित करती है।