राजस्थान: की राजधानी जयपुर से निकलकर एक छोटी सी फिल्म ने दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना ली है। युवा फिल्मकार राजदीप वर्मा की पहली स्वतंत्र शॉर्ट फिल्म ‘डिजायर’ ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में ऐसा धमाल मचाया है कि हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है।
इस फिल्म ने न सिर्फ भारत, बल्कि रोम और जापान जैसे देशों में भी अपनी छाप छोड़ी है। खास बात यह है कि ‘डिजायर’ ने अब तक कुल 23 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर लिए हैं, जो किसी भी नए फिल्मकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘डिजायर’ का दबदबा
फिल्म को पहले Rome International Film Festival 2025 में रोम प्रिज्मा अवॉर्ड के लिए चुना गया। इसके बाद इसने Japan International Global Film Festival 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 अवॉर्ड जीत लिए।
जापान के इस प्रतिष्ठित मंच पर फिल्म को श्रेष्ठ हिंदी फिल्म, श्रेष्ठ निर्देशक (स्वतंत्र फिल्म), श्रेष्ठ पटकथा, श्रेष्ठ संवाद लेखक और श्रेष्ठ थ्रिलर जैसी कई अहम श्रेणियों में सम्मान मिला। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिंदी फिल्म को इतनी बड़ी संख्या में पुरस्कार मिलना दुर्लभ है।
दिल्ली में भी मचाया धमाल
फिल्म ने भारत में आयोजित Vintage International Film Festival 2026 (दिल्ली) में भी अपना परचम लहराया। यहां 70 देशों से आई 10,171 फिल्मों के बीच ‘डिजायर’ ने 10 पुरस्कार जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
राजस्थान से भेजी गई 200 से अधिक फिल्मों में से केवल 8 फिल्मों का चयन हुआ था, जिनमें ‘डिजायर’ भी शामिल थी। यह अपने आप में फिल्म की गुणवत्ता और प्रभाव को दर्शाता है।
कहानी जो दिल को छू जाए
‘डिजायर’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि आज के युवाओं की मानसिकता और संघर्षों का आईना है। कहानी दो दोस्तों—यश और दीपू—के इर्द-गिर्द घूमती है।
यश अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए शहर आता है, लेकिन धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में फंस जाता है। वहीं दीपू, प्रेम में धोखा मिलने के बाद टूट जाता है। दोनों अपनी परेशानियों से बचने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, लेकिन यह रास्ता उनकी जिंदगी को और जटिल बना देता है।
फिल्म यह दिखाती है कि इंसान की इच्छाएं (Desire) कैसे उसे सही और गलत के बीच की रेखा को पार करने पर मजबूर कर देती हैं। यही गहराई फिल्म को खास बनाती है।

पहली फिल्म, लेकिन बड़ा धमाका
फिल्मकार Rajdeep Verma पिछले 15 वर्षों से थिएटर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने University of Mumbai Academy of Theatre Arts से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
‘डिजायर’ उनकी पहली स्वतंत्र फिल्म है, जिसे उन्होंने खुद लिखा और निर्देशित किया है। पहली ही फिल्म में इस तरह की सफलता पाना उनके अनुभव और मेहनत को दर्शाता है।
राजदीप वर्मा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जूरी और अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सफलता उन्हें आगे और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगी।
हिंदी सिनेमा के लिए गर्व का क्षण
‘डिजायर’ की सफलता केवल एक फिल्म या एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय और खासकर हिंदी सिनेमा के लिए गर्व का विषय है। यह फिल्म दिखाती है कि छोटे बजट और सीमित संसाधनों के बावजूद, अगर कहानी दमदार हो तो वह वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकती है।