जयपुर: क्रिकेट इतिहास में कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से नाम कमाया, लेकिन कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो समय के साथ करोड़ों का फायदा दे जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर Shane Warne का एक ऐसा ही फैसला आज उनके परिवार के लिए बड़ी सौगात बनकर सामने आया है।
करीब 20 साल पहले जब इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत हुई थी, तब Rajasthan Royals ने वॉर्न को टीम का कप्तान बनाया था। उस समय वॉर्न ने केवल खिलाड़ी के रूप में सैलरी लेने के बजाय एक अनोखी शर्त रखी—उन्होंने फ्रेंचाइजी में हिस्सेदारी (equity) की मांग की। यह फैसला उस समय सामान्य नहीं था, लेकिन आज यह एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो रहा है।
हिस्सेदारी ने बदली किस्मत
वॉर्न को हर सीजन खेलने के लिए सैलरी के साथ-साथ करीब 0.75% टीम की हिस्सेदारी दी गई थी। उन्होंने 2008 से 2011 तक चार सीजन खेले, जिससे उनकी कुल हिस्सेदारी लगभग 3% तक पहुंच गई।
उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटी सी हिस्सेदारी आगे चलकर इतनी बड़ी रकम में बदल जाएगी।
फ्रेंचाइजी की वैल्यू में जबरदस्त उछाल
2008 में राजस्थान रॉयल्स को लगभग 6.7 करोड़ डॉलर में खरीदा गया था। लेकिन अब हाल ही में एक बड़ी डील के तहत टीम की वैल्यू करीब 1.63 अरब डॉलर (लगभग 15,300 करोड़ रुपए) तक पहुंच गई है।
इस बढ़ती वैल्यू के कारण वॉर्न की 3% हिस्सेदारी की कीमत करीब 450 से 460 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। यानी, एक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ने उनके परिवार के लिए करोड़ों का खजाना तैयार कर दिया है।
IPL 2008: जब वॉर्न ने रचा इतिहास
Indian Premier League के पहले ही सीजन में वॉर्न ने अपनी कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाया था। यह जीत आज भी IPL इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक मानी जाती है।
वॉर्न ने उस सीजन में न केवल कप्तानी की, बल्कि टीम के मेंटर और रणनीतिकार के रूप में भी अहम भूमिका निभाई। युवा खिलाड़ियों से भरी टीम को जीत दिलाना उनकी लीडरशिप का बड़ा उदाहरण था।

परिवार को कैसे मिलेगा पैसा?
सूत्रों के अनुसार, वॉर्न के परिवार को यह रकम सीधे तौर पर तभी मिल पाएगी जब वे अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। यह प्रक्रिया संभवतः IPL 2026 सीजन के बाद पूरी हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए Board of Control for Cricket in India की मंजूरी जरूरी होगी। एक बार अनुमति मिलने के बाद, परिवार इस हिस्सेदारी को बेचकर करोड़ों की कमाई कर सकता है।
सिर्फ खिलाड़ी नहीं, दूरदर्शी भी थे वॉर्न
शेन वॉर्न को अक्सर उनकी लेग स्पिन गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है, लेकिन यह मामला साबित करता है कि वे खेल के साथ-साथ बिजनेस समझ भी रखते थे।
उनका यह निर्णय आज के खिलाड़ियों के लिए भी एक सीख है कि खेल के साथ-साथ निवेश और दीर्घकालिक सोच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
IPL में बढ़ती फ्रेंचाइजी वैल्यू
पिछले कुछ सालों में IPL टीमों की वैल्यू में तेजी से वृद्धि हुई है। ब्रॉडकास्ट डील्स, स्पॉन्सरशिप और ग्लोबल फैनबेस के चलते यह लीग दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग बन चुकी है।
ऐसे में शुरुआती दौर में लिए गए छोटे-छोटे निवेश आज करोड़ों का रिटर्न दे रहे हैं—और वॉर्न इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं।