देशभर में वोटर लिस्ट की बड़ी सफाई! दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों में SIR लागू, अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची को अपडेट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर नई घोषणा कर दी है। आयोग ने दिल्ली और कर्नाटक समेत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।

आयोग के सचिव पवन दीवान ने संबंधित 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि 24 जून 2025 को जारी आदेश के तहत पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से SIR कराया जाना है।

पहले और दूसरे चरण की स्थिति

SIR का पहला चरण बिहार में पूरा किया गया था, जहां अंतिम मतदाता सूची में 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए। दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 28 अक्टूबर 2025 से प्रक्रिया जारी है।

असम में SIR के स्थान पर विशेष पुनरीक्षण 10 फरवरी को पूरा किया गया।


SIR को 6 सवाल-जवाब में समझें

1. SIR क्या है?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है। 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाता है। मृतक या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नाम-पते में त्रुटियों को सुधारा जाता है।

2. सबसे पहले कहां हुआ?

पहले चरण में बिहार में SIR कराया गया। दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में इसकी घोषणा की गई।

3. प्रक्रिया कौन करता है?

ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं।

4. मतदाता को क्या करना होगा?

SIR के दौरान BLO/BLA मतदाता को फॉर्म देंगे। मतदाता को अपनी जानकारी सत्यापित करनी होगी। यदि किसी का नाम दो स्थानों पर दर्ज है तो एक जगह से हटवाना होगा। नया नाम जुड़वाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरना होगा।

5. कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं?

पेंशनर पहचान पत्र
सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र
जन्म प्रमाणपत्र
पासपोर्ट
10वीं की मार्कशीट
स्थायी निवास प्रमाणपत्र
वन अधिकार प्रमाणपत्र
जाति प्रमाणपत्र
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में नाम
परिवार रजिस्टर में नाम
जमीन या मकान आवंटन पत्र
आधार कार्ड

6. SIR का उद्देश्य क्या है?

1951 से 2004 तक नियमित रूप से SIR होता रहा, लेकिन पिछले 21 वर्षों में व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण नहीं हुआ। इस दौरान माइग्रेशन, मृत्यु, दोहरी एंट्री और विदेशी नागरिकों के नाम शामिल होने जैसी समस्याएं सामने आईं। आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे।


सेकेंड फेज: कहां जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट?

दूसरे चरण के तहत नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 4 नवंबर 2025 से SIR शुरू हुआ था। इन क्षेत्रों में कुल 50.99 करोड़ मतदाता हैं। राज्यों को 7 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची जारी करनी थी।

अब तक गुजरात, लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने फाइनल सूची जारी कर दी है।

गुजरात में SIR के बाद 4.40 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए हैं।
लक्षद्वीप में 57,607 मतदाताओं के नाम शामिल हैं।
पुडुचेरी की अंतिम सूची में 9,44,211 मतदाता दर्ज हैं।

राजस्थान की अंतिम सूची जारी करने की तारीख 14 फरवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी गई है। पश्चिम बंगाल की डेडलाइन 28 फरवरी और उत्तर प्रदेश की 10 अप्रैल तक बढ़ाई गई है।

देशभर में मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक कदम उठाया है। दिल्ली और कर्नाटक सहित 22 राज्यों में अप्रैल से SIR प्रक्रिया शुरू होने से करोड़ों मतदाताओं की जानकारी अपडेट होगी। आयोग का लक्ष्य साफ है—हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न रहे।

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