गुजरात में लागू हुआ बड़ा कानून! UCC बिल पास होते ही बदले शादी, तलाक और संपत्ति के नियम

गुजरात: ने इतिहास रचते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया है। मंगलवार देर रात गांधीनगर विधानसभा में बहुमत के साथ UCC बिल पास कर दिया गया। इससे गुजरात, उत्तराखंड के बाद ऐसा करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल भी गरमाया रहा। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने वोटिंग से पहले वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद बिल को आसानी से बहुमत मिल गया। राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा।

क्या है UCC और क्यों है महत्वपूर्ण?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि देश या राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े कानून एक समान होंगे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। अभी तक ये कानून अलग-अलग धर्मों के अनुसार लागू होते थे।

शादी के लिए नया नियम लागू

इस नए कानून के तहत अब हर विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यदि कोई शादी रजिस्टर नहीं कराई जाती है, तो वह अवैध नहीं मानी जाएगी, लेकिन संबंधित व्यक्ति पर 10 हजार से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे बाल विवाह और फर्जी विवाह जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी।

संपत्ति में सभी को बराबर अधिकार

UCC के लागू होने के बाद, यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसकी संपत्ति माता-पिता, पति या पत्नी और बच्चों में समान रूप से बांटी जाएगी। इससे महिलाओं और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सख्त नियम

गुजरात UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी ढांचे में लाया गया है। अब ऐसे रिश्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यदि कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के एक महीने से ज्यादा साथ रहता है, तो उसे 3 महीने की जेल या 10 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

इसके अलावा, यदि लिव-इन में जन्मा बच्चा है, तो उसे पूरी तरह वैध माना जाएगा और दोनों अभिभावकों की जिम्मेदारी तय होगी।

तलाक के नियमों में बदलाव

अब तलाक के लिए भी एक समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी। क्रूरता, धर्म परिवर्तन, मानसिक बीमारी या लंबे समय तक अलग रहने जैसे आधारों पर तलाक लिया जा सकेगा। साथ ही, अदालत द्वारा तलाक मंजूर होने के 60 दिनों के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।

सरकार का पक्ष और विपक्ष की नाराजगी

राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इसे “ऐतिहासिक दिन” बताते हुए कहा कि यह कानून समाज के हर वर्ग को समान न्याय देगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि बिना पर्याप्त चर्चा के इतने बड़े कानून को पारित किया गया है।

UCC का ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में समान नागरिक संहिता की चर्चा नई नहीं है। इसकी जड़ें 19वीं सदी से जुड़ी हैं, जब ब्रिटिश काल में एक समान कानून की जरूरत महसूस की गई थी। आजादी के बाद 1948 में संविधान सभा में इसे लेकर चर्चा हुई, लेकिन विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के चलते इसे लागू नहीं किया जा सका।

गुजरात में UCC बिल का पास होना भारतीय कानूनी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर समानता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा, वहीं इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठाते हैं या नहीं।

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