अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन सियासी हलचल तेज हो गई, जब डिप्टी स्पीकर पद के लिए चुनाव कराया गया। सूरत पश्चिम से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी को ध्वनिमत से विधानसभा का नया उपाध्यक्ष घोषित किया गया।
कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने भी नामांकन दाखिल किया था, लेकिन सदन में उनका प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने पूर्णेश मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
पूर्णेश मोदी अब 2027 तक गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।
मजबूत वापसी के तौर पर देखा जा रहा फैसला
पूर्णेश मोदी तीन बार के विधायक हैं और इससे पहले राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। 2013 के उपचुनाव में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, इसके बाद 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नियुक्ति उनकी मजबूत वापसी का संकेत है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूर्णेश मोदी संगठन में अपेक्षाकृत हाशिए पर चले गए थे। लेकिन हालिया संगठनात्मक बदलावों के बाद उन्हें अहम जिम्मेदारी देकर पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है।

राहुल गांधी मानहानि केस से मिली राष्ट्रीय पहचान
पूर्णेश मोदी उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी को लेकर मानहानि का केस दायर किया था।
सूरत की अदालत ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी। यह मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है।
ओबीसी समीकरण और सूरत पर नजर
पूर्णेश मोदी को डिप्टी स्पीकर बनाकर बीजेपी ने राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। पार्टी ने ओबीसी वर्ग को संदेश देने के साथ-साथ सूरत क्षेत्र में अपने संगठनात्मक आधार को और मजबूत करने का प्रयास किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी नगर निगम चुनावों को देखते हुए यह फैसला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
जेठाभाई भरवाड़ की जगह संभाली जिम्मेदारी
पूर्णेश मोदी ने जेठाभाई भरवाड़ की जगह ली है, जिन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
वर्तमान में गुजरात विधानसभा के स्पीकर शंकर चौधरी हैं।
गुजरात विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत ही बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से हुई। पूर्णेश मोदी का डिप्टी स्पीकर बनना न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक वापसी है, बल्कि बीजेपी की रणनीतिक चाल भी माना जा रहा है।
ओबीसी समीकरण, सूरत क्षेत्र की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन—इन सभी पहलुओं को साधते हुए पार्टी ने यह संदेश दिया है कि आने वाले चुनावों से पहले नेतृत्व में संतुलन और मजबूती दोनों पर जोर रहेगा।