पहले 165 सेमी पास, अब फेल! गुजरात पुलिस भर्ती में ‘घटी लंबाई’ का विवाद हाई कोर्ट पहुंचा

अहमदाबाद। गुजरात में पुलिस भर्ती के दौरान लंबाई माप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि पिछली भर्ती में उनकी लंबाई 165 सेंटीमीटर या उससे अधिक मापी गई थी, लेकिन इस बार शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में उनकी हाइट 165 सेमी से कम बताकर अयोग्य घोषित कर दिया गया।

मामला अब Gujarat High Court पहुंच चुका है।

165 सेंटीमीटर की अनिवार्य शर्त

गुजरात पुलिस भर्ती में न्यूनतम 165 सेंटीमीटर लंबाई अनिवार्य है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले चरणों में वे इसी मानक के आधार पर योग्य घोषित किए गए थे।

लेकिन हालिया माप में उनकी लंबाई कम बताई गई, जिससे उनकी भर्ती प्रक्रिया रुक गई।

किन उम्मीदवारों ने दी चुनौती

अदालत का दरवाजा खटखटाने वालों में गांधीनगर के तुषार भालिया और गोविंद सिंधाव, बनासकांठा के पप्पू परमार और अहमदाबाद के मुकेश चौहान शामिल हैं। इन सभी ने पुलिस विभाग के विभिन्न पदों के लिए आवेदन किया था।

इनका दावा है कि पूर्व भर्ती प्रक्रिया में वे निर्धारित मानक पर खरे उतरे थे, जबकि इस बार मामूली अंतर दिखाकर बाहर कर दिया गया।

कोर्ट का सख्त रुख

लगातार याचिकाएं आने पर न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति निर्जर मेहता ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रत्येक याचिकाकर्ता 10,000 रुपये अदालत रजिस्ट्री में जमा करे। यदि दोबारा माप में उनका दावा सही पाया जाता है, तो राशि वापस कर दी जाएगी।

फिर से होगी लंबाई की जांच

कोर्ट ने चिकित्सा पर्यवेक्षण में दोबारा माप का आदेश दिया है। अभ्यर्थियों को सोला स्थित GMERS Civil Hospital में निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने को कहा गया है।

पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने और विस्तृत रिपोर्ट 23 फरवरी 2026 को अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इंच और सेंटीमीटर के अंतर को लेकर कोई भ्रम या पारदर्शिता की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी।

भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

यह मामला भर्ती प्रक्रियाओं में मापदंडों की सटीकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि माप की प्रक्रिया में त्रुटि है, तो उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है।

गुजरात पुलिस भर्ती में 165 सेंटीमीटर की शर्त को लेकर उठा यह विवाद अब न्यायिक जांच के दायरे में है। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से दोबारा माप और वीडियोग्राफी का आदेश पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब अदालत की रिपोर्ट से ही तय होगा कि सचमुच उम्मीदवारों की लंबाई घटी है या माप प्रक्रिया में कहीं चूक हुई है।

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