2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारी कर रहे गुजरात में अब मेट्रो और बुलेट ट्रेन के बाद रैपिड रेल (RRTS) की योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार पांच सैटेलाइट टाउन को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
अगर यह योजना साकार होती है तो दिल्ली-एनसीआर के बाद गुजरात देश का दूसरा बड़ा RRTS नेटवर्क वाला राज्य बन सकता है।
2025 को ‘शहरी विकास वर्ष’ घोषित
गुजरात सरकार ने साल 2025 को ‘शहरी विकास वर्ष’ घोषित किया है। नियोजित शहरी विकास की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2005 में मुख्यमंत्री रहते हुए की थी। 20 वर्ष पूरे होने पर इस पहल को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने विशेष वर्ष घोषित किया।
राज्य सरकार ने बड़े शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए पांच कस्बों को सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

कौन-कौन से शहर होंगे कनेक्ट?
रिपोर्ट के अनुसार, शहरी विकास विभाग इस मेगा प्रोजेक्ट की तकनीकी रूपरेखा तैयार कर रहा है। प्रस्तावित कनेक्टिविटी इस प्रकार होगी:
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साणंद को अहमदाबाद से
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सावली को वडोदरा से
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कलोल को गांधीनगर से
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बारडोली को सूरत से
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हीरासर को राजकोट से
इन सैटेलाइट टाउन में पहले से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर साणंद और सावली में कई बड़ी कंपनियों के कार्यालय और प्लांट मौजूद हैं।
अहमदाबाद-साणंद पहला RRTS रूट
संभावना जताई जा रही है कि पहला RRTS कॉरिडोर अहमदाबाद और साणंद के बीच बनाया जाएगा। यह रूट औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों को तेजी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार जल्द ही इस परियोजना के लिए टेक्निकल बिड आमंत्रित कर सकती है। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या होगा फायदा?
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बड़े शहरों पर ट्रैफिक और आबादी का दबाव कम होगा
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सैटेलाइट टाउन में निवेश और रोजगार बढ़ेगा
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उद्योग और आवासीय क्षेत्रों को तेज कनेक्टिविटी मिलेगी
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2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए आधुनिक परिवहन ढांचा तैयार होगा
RRTS हाई-स्पीड, कम समय में लंबी दूरी तय करने वाली क्षेत्रीय रेल प्रणाली है, जो मेट्रो से अलग और अधिक दूरी कवर करने में सक्षम होती है।
गुजरात में मेट्रो और बुलेट ट्रेन के बाद RRTS की योजना राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा दे सकती है। पांच सैटेलाइट टाउन को जोड़ने की यह पहल न केवल शहरी दबाव कम करेगी, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।
अगर अहमदाबाद-साणंद रूट से शुरुआत होती है, तो आने वाले वर्षों में गुजरात देश के सबसे आधुनिक ट्रांजिट नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।