‘हथियार डालो या मौत का सामना करो’—Donald Trump की दो टूक के बाद Iran पर अमेरिका-इस्राइल का बड़ा हमला!

पश्चिम एशिया: में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Iran के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त सैन्य हमले की पुष्टि की है। अमेरिका और Israel की ओर से की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी—“हथियार डाल दो या फिर निश्चित मौत का सामना करो।”

क्या है हमले की वजह?

ट्रंप ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उनके मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा सक्रिय करने और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की कोशिश तेज कर दी थी, जो यूरोप और अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती थीं।

ट्रंप ने कहा, “ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। अगर उसने कोशिश की तो उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।”

47 वर्षों का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी शासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 47 वर्षों से ईरान दुनिया और अमेरिका के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने ईरान को “राज्य समर्थित आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक” बताया और कहा कि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिकी हताहत हो सकते हैं, लेकिन “युद्ध में ऐसा अक्सर होता है।”

अभियान का नाम और रणनीति

पेंटागन ने ईरान के खिलाफ इस अमेरिकी अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है, जबकि इस्राइल ने अपने सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ बताया है। इन दोनों अभियानों का उद्देश्य सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को जड़ से खत्म करना है।

इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि यह कार्रवाई ईरान की बढ़ती आक्रामकता का जवाब है।

तेहरान में आपात स्थिति

हमले के बाद राजधानी तेहरान में कई धमाकों की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कई संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर नुकसान का पूरा आकलन सामने नहीं आया है, लेकिन शहर में आपातकाल जैसी स्थिति बताई जा रही है।

अमेरिका की ओर से लगातार चेतावनियां जारी की जा रही हैं और ईरान को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त सैन्य संसाधन तैनात किए गए हैं।

ईरानी जनता से अपील

ट्रंप ने अपने बयान में ईरानी नागरिकों से भी सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि यह “एक नेक मिशन” है और इसका मकसद ईरान में तानाशाही शासन को खत्म करना है। ट्रंप ने ईरानी जनता से कहा कि जब सैन्य अभियान पूरा हो जाए, तो वे “अपनी सरकार पर कब्जा कर लें।”

यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि इस सैन्य कार्रवाई के पीछे शासन परिवर्तन की रणनीति भी हो सकती है।

पश्चिम एशिया पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संयुक्त हमले से पश्चिम एशिया में पहले से चल रहा तनाव और गहरा सकता है। इस्राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिका-इस्राइल का ईरान पर हमला क्षेत्रीय भू-राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसका प्रभाव एशिया और यूरोप तक महसूस किया जा सकता है।


निष्कर्ष:

अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किया गया यह संयुक्त सैन्य हमला पश्चिम एशिया में एक बड़े बदलाव का संकेत है। ट्रंप की सख्त चेतावनी और ‘हथियार डालो या मौत का सामना करो’ जैसे बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका अब समझौते की बजाय आक्रामक रणनीति अपना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान इस कार्रवाई का कैसे जवाब देता है और क्या यह संघर्ष एक बड़े युद्ध में तब्दील होता है।

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