“जेब गरम है तो सब तुम्हारा!” कथा में Pradeep Mishra का बड़ा बयान, बोले—बिना पैसे मंदिर में भी जल्दी दर्शन मुश्किल

राजधानी: Jaipur के मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक Pradeep Mishra ने समाज में बढ़ती धन-प्रधान मानसिकता पर तीखा बयान दिया। कथा के तीसरे दिन उन्होंने कहा कि आज के समय में इंसान की कीमत नहीं, बल्कि उसके पैसे की कीमत है।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा, “अगर जेब गरम है तो सब कुछ तुम्हारा है—होटल का कमरा, ट्रेन की सीट, फ्लाइट की सीट। लेकिन अगर जेब खाली है, तो कुछ भी तुम्हारा नहीं।” उनके इस बयान पर कथा स्थल पर मौजूद हजारों श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर सुनते नजर आए।

मंदिर में भी पैसे का प्रभाव?

Pradeep Mishra ने कहा कि कलयुग में हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना पैसे के मंदिरों में भी जल्दी दर्शन करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने त्रेता युग का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भगवान के दर्शन दुर्लभ होते थे, लेकिन आज पैसा देकर सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं।

उन्होंने कहा, “धन देकर आप जल्दी दर्शन कर सकते हैं, वीआईपी ट्रीटमेंट पा सकते हैं, लेकिन भगवान को अपना नहीं बना सकते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर केवल भाव और श्रद्धा देखते हैं, न कि धन-संपत्ति।

धन से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता

कथावाचक ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय लोगों के पास पैसा तो था, लेकिन सांस नहीं खरीद पाए। उन्होंने कहा, “धन से अस्पताल मिल सकता है, वेंटिलेटर मिल सकता है, लेकिन जीवन नहीं मिल सकता।”

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीजें—जन्म, मरण और विवाह—भगवान के हाथ में होती हैं और इन्हें कोई इंसान नियंत्रित नहीं कर सकता।

भगवान शंकर और आस्था का संदेश

कथा के दौरान Lord Shiva की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शंकर को किसी के धन से कोई मतलब नहीं होता। वे केवल भक्त के भाव और सच्चे मन को देखते हैं।

उन्होंने बताया कि शिव महापुराण में वर्णित है कि भगवान शंकर पर चढ़ाया गया जल पीने से मनुष्य के तीन प्रकार के पाप—कायिक, वाचिक और मानसिक—समाप्त हो जाते हैं।

भाग्य और भविष्य पर टिप्पणी

Pradeep Mishra ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जो भविष्य बताने का दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग खुद को बड़ा आचार्य बताकर लोगों का भविष्य बताने का दावा करते हैं, लेकिन शिव महापुराण के अनुसार भाग्य और भविष्य केवल भगवान के अधीन हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने भी राजा दशरथ को भगवान राम का भाग्य बताने से इनकार कर दिया था, जो यह दर्शाता है कि भविष्य जानना किसी मनुष्य के वश में नहीं है।

श्रद्धा से जुड़ने का आह्वान

कथावाचक ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे कथा में केवल भीड़ बढ़ाने या समय बिताने के लिए न आएं, बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ शामिल हों। उन्होंने कहा कि यदि मन से भक्ति की जाए तो ईश्वर हर जगह उपलब्ध हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर की साधना के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। दिन के किसी भी समय कुछ पल निकालकर भगवान की आराधना की जा सकती है।

हर शिवलिंग में 12 ज्योतिर्लिंग का स्वरूप

कथा में उन्होंने एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक बात बताते हुए कहा कि केवल बड़े तीर्थस्थलों में ही नहीं, बल्कि हर शिवलिंग में 12 ज्योतिर्लिंगों का स्वरूप होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अपने आसपास के मंदिरों में भी उतनी ही श्रद्धा रखें जितनी बड़े तीर्थों में रखते हैं।

Pradeep Mishra के इस बयान ने समाज में धन और आस्था के बीच संतुलन पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि धन से सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, लेकिन सच्ची भक्ति और ईश्वर की कृपा केवल श्रद्धा और सच्चे मन से ही प्राप्त होती है।

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