नई दिल्ली: भारत और कनाडा के रिश्तों में एक बड़ा मोड़ तब आया जब सोमवार सुबह नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस मुलाकात के बाद दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में 10 साल के लिए यूरेनियम सप्लाई का ऐतिहासिक समझौता करने की घोषणा की।
सूत्रों के मुताबिक, यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है और इससे भारत के तेजी से विस्तार कर रहे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है, और भारत के लिए यह दीर्घकालिक आपूर्ति ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
निवेश और ट्रेड पर भी जोर
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच निवेश और ट्रेड डील को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई है। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। यह सहयोग भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को नई दिशा देगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग में विस्तार
बैठक में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।
इसी उद्देश्य से ‘भारत-कनाडा रक्षा संवाद’ की स्थापना करने का फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और परिपक्व संबंधों का प्रतीक है।
कृषि और खाद्य सुरक्षा में साझेदारी
ऊर्जा और रक्षा के अलावा, कृषि और कृषि प्रौद्योगिकी भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। भारत में ‘भारत-कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य दालों और प्रोटीन फसलों के उत्पादन, अनुसंधान और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना है।
दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा और एग्री-टेक सेक्टर में नवाचार को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई।
2013 के समझौते से आगे की पहल
भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम की सप्लाई शुरू की थी। अब 10 साल की इस नई डील को उस सहयोग का विस्तार माना जा रहा है।
भारत अपने परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा मांग में हो रही वृद्धि और कार्बन उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धताओं के बीच परमाणु ऊर्जा को एक स्थिर और स्वच्छ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है और हर समस्या का समाधान संवाद के जरिए होना चाहिए।
उन्होंने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और कनाडा का घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।
रणनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के रिश्तों में नई गर्माहट का संकेत भी है। हाल के वर्षों में कुछ राजनयिक तनाव के बावजूद, यह समझौता दर्शाता है कि रणनीतिक और आर्थिक हित प्राथमिकता पर हैं।
कनाडा के लिए भारत एक तेजी से उभरता बाजार है, जबकि भारत के लिए कनाडा संसाधनों और प्रौद्योगिकी का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में यूरेनियम सप्लाई समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को संतुलित करता है।