शादीशुदा होकर लिव-इन में रहना जुर्म नहीं! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गिरफ्तारी पर भी लगाई रोक

प्रयागराज: से एक अहम कानूनी फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि शादीशुदा पुरुष का किसी बालिग महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशन में रहना अपराध नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि कानून और नैतिकता दो अलग-अलग विषय हैं और न्यायालय का काम कानून के आधार पर निर्णय देना है, न कि सामाजिक नैतिकता के आधार पर।

यह टिप्पणी जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मामला शाहजहांपुर के एक कपल से जुड़ा था, जिसने परिवार से मिल रही धमकियों के बीच सुरक्षा की मांग की थी।

⚖️ कोर्ट का स्पष्ट रुख: कानून बनाम नैतिकता

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के शादीशुदा होने के बावजूद, अगर वह किसी अन्य बालिग महिला के साथ सहमति से लिव-इन में रह रहा है, तो इसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।

🛑 कपल को राहत, गिरफ्तारी पर रोक

हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए कपल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

इसके साथ ही महिला के परिवार को निर्देश दिया गया कि वे कपल से संपर्क न करें और किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाएं।

👮‍♂️ पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश

कोर्ट ने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

अदालत ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों की सुरक्षा करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

⚠️ ऑनर किलिंग का खतरा बताया गया

महिला ने अपने आवेदन में कहा था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से अपने पार्टनर के साथ रह रही है।

कपल ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार की ओर से जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिससे ऑनर किलिंग का खतरा बना हुआ है।

📄 FIR को दी चुनौती

मामले में लड़की की मां ने 8 जनवरी 2026 को शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने में FIR दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नेत्रपाल नाम का व्यक्ति उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसमें एक अन्य व्यक्ति पर सहयोग का आरोप भी लगाया गया।

इस FIR को लड़की और उसके पार्टनर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और सुरक्षा की मांग की।

🧾 अदालत में क्या दलीलें दी गईं

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि महिला बालिग है, जिसका उल्लेख खुद FIR में भी किया गया है।

वहीं, लड़की की मां की ओर से दलील दी गई कि पुरुष शादीशुदा है और उसका किसी अन्य महिला के साथ रहना गलत है।

इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नैतिकता का मुद्दा हो सकता है, लेकिन कानून की नजर में यह अपराध नहीं है।

📌 गरिमा भंग नहीं होती: कोर्ट

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सहमति से लिव-इन में रहने से किसी की गरिमा भंग नहीं होती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज के बदलते स्वरूप को देखते हुए ऐसे रिश्तों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।

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