नई दिल्ली। अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन को लेकर भारत की राजनीति में उठा तूफान अब और तेज हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनकी एपस्टीन से तीन से चार बार मुलाकात हुई थी। हालांकि उन्होंने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताते हुए किसी भी तरह के आपराधिक या अनैतिक संबंध से साफ इनकार किया।

पुरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के भीतर एपस्टीन विवाद में उनका नाम लिया था, जिससे राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैल गई।

🗣️ पुरी की सफाई: “30 लाख ईमेल में सिर्फ 3–4 मीटिंग”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप पुरी ने कहा—

“जब मैंने 2009 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला, तब से लेकर 2017 तक के लगभग 30 लाख ई-मेल सार्वजनिक किए जा चुके हैं। इनमें सिर्फ तीन या चार मुलाकातों का जिक्र है और वे सभी इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी थीं।”

पुरी ने दो टूक कहा कि इन बैठकों का यौन अपराध, मानव तस्करी या किसी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं था।

🏛️ राहुल गांधी का संसद में हमला

बुधवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाते हुए कहा—

“अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं जानता हूं कि उन्हें एपस्टीन से किसने मिलवाया। हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने मिलवाया था।”

राहुल के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला।

🌐 रीड हॉफमैन से मुलाकात पर भी सफाई

पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से भी मिले थे, लेकिन वह चर्चा भारत में इंटरनेट और व्यापारिक अवसरों पर केंद्रित थी।

उन्होंने कहा—

“मैं उस समय एक निजी नागरिक के तौर पर भारत की संभावनाओं पर बात कर रहा था। किसी भी तरह की गलत गतिविधि का सवाल ही नहीं उठता।”


🔴 कांग्रेस का दावा: अनिल अंबानी ने मांगी थी एपस्टीन से मदद

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 1 फरवरी को X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि अनिल अंबानी और जेफ्री एपस्टीन के बीच 16 मार्च 2017 को हुई चैट सामने आई है।

इन चैट्स में अनिल अंबानी, एपस्टीन से

से मुलाकात कराने में मदद मांगते दिखाई देते हैं। साथ ही ट्रम्प-मोदी मुलाकात के लिए भी एपस्टीन से सहयोग मांगा गया था।

दूसरी पोस्ट में 24 मई 2019 की चैट का स्क्रीनशॉट था, जिसमें एपस्टीन ने बैनन से कहा—

“मोदी की मीटिंग वाकई दिलचस्प थी। मोदी के ‘आदमी’ ने बताया कि वॉशिंगटन में कोई भी उससे बात नहीं करता।”


🏛️ सरकार की प्रतिक्रिया: “एक अपराधी की मनगढ़ंत बातें”

विदेश मंत्रालय ने इस विवाद पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा—

“एपस्टीन फाइल्स में पीएम के इजराइल दौरे को लेकर कही गई बातें एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत और निराधार बातें हैं। जुलाई 2017 का इजराइल दौरा पूरी तरह आधिकारिक था।”


कौन था जेफ्री एपस्टीन?


🧠 निष्कर्ष:

एपस्टीन फाइल्स ने एक बार फिर भारतीय राजनीति को अंतरराष्ट्रीय विवाद से जोड़ दिया है। जहां हरदीप पुरी अपनी मुलाकातों को पेशेवर बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे सत्ता और पूंजी के गहरे रिश्तों का सबूत बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद से लेकर जांच एजेंसियों तक कितना आगे जाएगा, इस पर पूरे देश की नजर टिकी है।