नेपाल: की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। नए प्रधानमंत्री के रूप में बालेन शाह के शपथ लेते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई पिछले साल हुए हिंसक Gen-Z प्रदर्शनों के मामले में की गई है, जिसमें 77 लोगों की मौत हुई थी।
पुलिस ने शनिवार सुबह ओली को भक्तपुर स्थित उनके घर से हिरासत में लिया। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हालात संभालने में गंभीर लापरवाही बरती।
सुबह-सुबह हुई गिरफ्तारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, केपी शर्मा ओली को सुबह उनके निवास से गिरफ्तार किया गया, जबकि रमेश लेखक को सूर्यविनायक इलाके से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।
जांच पूरी होने के बाद उन्हें आर्म्ड पुलिस फोर्स की महाराजगंज स्थित बटालियन में शिफ्ट किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि कस्टडी की पूरी तैयारी पहले से कर ली गई थी।
Gen-Z प्रदर्शन बना कार्रवाई की वजह
यह पूरा मामला पिछले साल सितंबर में हुए Gen-Z प्रदर्शनों से जुड़ा है। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते हिंसक हो गया था।
प्रदर्शन के दौरान सरकारी इमारतों में आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 77 लोगों की जान गई और अरबों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद एक्शन
इस मामले की जांच एक आयोग ने की थी, जिसकी अगुआई पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की ने की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय की सरकार हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुरक्षा एजेंसियों को पहले से खुफिया चेतावनी मिली थी, लेकिन समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से स्थिति बेकाबू हो गई।
आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जांच की सिफारिश की थी।
नई सरकार के गठन के बाद तेज हुई कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब बालेन शाह ने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उनकी अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट लागू करने का फैसला लिया गया।
इसके बाद ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी से पहले काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

आरोप क्या हैं?
आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान करीब चार घंटे तक लगातार हिंसा और गोलीबारी होती रही, लेकिन सरकार ने समय रहते हालात को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।
इसके अलावा, कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की बात कही गई है।
आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि मामले की गहराई से जांच के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों का इस्तेमाल किया जाए।
ओली का राजनीतिक सफर
केपी शर्मा ओली नेपाल की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2015 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला था और बाद में 2018 में दोबारा सत्ता में लौटे।
हालांकि, Gen-Z प्रदर्शनों के बाद बढ़ते दबाव के चलते उन्हें सितंबर 2025 में इस्तीफा देना पड़ा था। उनकी सरकार पर उस समय भी हालात संभालने में विफल रहने के आरोप लगे थे
नेपाल में यह गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद जवाबदेही तय करने का संकेत भी मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और अदालत की कार्यवाही देश की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।