पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी ने राज्यों के साथ समीक्षा बैठक की, सरकार ने 60 दिन के ईंधन भंडार का भरोसा दिया।

पश्चिम एशिया: में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें मौजूदा हालात और देश की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।

यह बैठक डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया और अपने-अपने स्तर पर की गई तैयारियों की जानकारी साझा की।


राज्यों की तैयारियों पर फोकस

बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संभावित प्रभावों को देखते हुए राज्यों की तैयारी का आकलन करना था।

केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी आपात स्थिति में राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट रणनीति मौजूद हो।

हालांकि, आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए।


चुनावी राज्यों के लिए अलग व्यवस्था

सरकार ने चुनावी राज्यों के लिए अलग से समीक्षा बैठक की योजना बनाई है।

इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से अलग बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि तैयारियों का पूरा आकलन किया जा सके।

इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी राज्य की स्थिति अनदेखी न हो।


सरकार का भरोसा: 60 दिन का ईंधन स्टॉक

बैठक से पहले केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया के हालात का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर फिलहाल कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।

सरकार के अनुसार, देश के पास लगभग 60 दिनों का ईंधन भंडार उपलब्ध है, जो मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

लोगों से अपील की गई है कि वे ईंधन की कमी से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न दें।


तेल आपूर्ति के कई स्रोत, जोखिम कम

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारी कर रखी है।

देश 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है।

यह रणनीति वैश्विक संकट के दौरान भी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया के तनाव का असर सबसे ज्यादा होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है।

हालांकि, भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों के जरिए इस जोखिम को काफी हद तक कम कर लिया है।

सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है।


ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्र की प्राथमिकता

केंद्र सरकार का फोकस इस समय देश की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखना है।

तेल कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली है, जिससे सप्लाई में किसी तरह की रुकावट न आए।

सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *