गुजरात: के Vadodara में आयोजित ‘आदिवासी अधिकार संवाद’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में दावा किया कि मोदी सरकार की विदेश नीति स्वतंत्र नहीं है और प्रधानमंत्री अमेरिकी दबाव में काम कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने संसद में 25 मिनट का भाषण दिया, लेकिन उन्होंने अमेरिका के खिलाफ एक शब्द तक नहीं कहा। सच्चाई यह है कि मोदी 100% Donald Trump के कंट्रोल में हैं।”
तेल-गैस खरीद पर बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने अपने भाषण में सबसे बड़ा दावा यह किया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका से यह आश्वासन दिया है कि भारत बिना उसकी अनुमति के किसी अन्य देश से तेल और गैस नहीं खरीदेगा।
उन्होंने कहा, “अगर ट्रम्प कहेंगे कि रूस, ईरान या वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदना है, तो भारत ऐसा नहीं करेगा। मोदी सरकार हर फैसले में अमेरिका की मंजूरी का इंतजार करती है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर भारत की रणनीति चर्चा में है।
अडाणी और अमेरिका का जिक्र
राहुल गांधी ने उद्योगपति समूहों और सरकार के संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चल रहे कारोबारी मामलों का इस्तेमाल भारत की राजनीति को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “अडाणी से जुड़े मुद्दों के जरिए प्रधानमंत्री पर दबाव बनाया जा रहा है।” हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई।
आदिवासी मुद्दों पर केंद्रित भाषण
अपने संबोधन का बड़ा हिस्सा राहुल गांधी ने आदिवासी अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना में बिताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय देश के “असल मालिक” हैं, क्योंकि ‘जल, जंगल और जमीन’ पर उनका अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘आदिवासी’ शब्द की जगह ‘वनवासी’ शब्द का इस्तेमाल कर उनकी पहचान और अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है और उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं दिया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी नीतियां बड़े कॉरपोरेट्स के पक्ष में काम कर रही हैं, जिससे आदिवासी और कमजोर वर्ग पीछे छूट रहे हैं।

कृषि और ट्रेड डील पर चिंता
कांग्रेस नेता ने भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल दिया गया, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों को होगा।
उन्होंने कहा, “भारत में छोटे किसान 1-2 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं, जबकि अमेरिका में हजारों एकड़ में मशीनों से खेती होती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा असमान होगी और भारतीय किसानों पर असर पड़ेगा।”
जातिगत जनगणना और रोजगार का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में जातिगत जनगणना और निजीकरण के मुद्दे भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों के निजीकरण से आरक्षण की व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिससे दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग के अवसर कम हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना से समाज के वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे, जिससे नीतियां बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी।
राजनीतिक माहौल गरमाया
राहुल गांधी के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किए जाने की संभावना है, जबकि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और घरेलू स्तर पर आर्थिक व सामाजिक मुद्दों पर बहस तेज हो रही है।