विधानसभा में गूंजा तरबगंज: पतंजलि जन्मस्थली पर आयुष मेडिकल कॉलेज की मांग, कैथी घाट पुल और टेढ़ी नदी भी उठी

प्रेम नारायण पांडेय तरबगंज विधायक: ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने क्षेत्र गोंडा से जुड़े कई अहम विकास मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पांडेय ने राज्य सरकार द्वारा पेश बजट की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश की सभी विधानसभाओं में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं।

पतंजलि जन्मस्थली पर आयुष मेडिकल कॉलेज की मांग

तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने गोंडा जिले में महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली कोंडर में आयुष मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कॉलेज के लिए जमीन का चिन्हांकन किया जा चुका है और अब सरकार से बजट आवंटन की आवश्यकता है।

उन्होंने सदन में कहा कि यह क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है, ऐसे में यहां आयुष मेडिकल कॉलेज की स्थापना न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भी नई दिशा देगी।

कैथी घाट पुल निर्माण की जरूरत

विधायक ने कैथी घाट पर नए पुल के निर्माण को अत्यंत आवश्यक बताया। उनके अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं और वर्तमान व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि चार वर्ष पहले भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।

टेढ़ी नदी के पुनर्जीवन की मांग

सदन में उन्होंने टेढ़ी नदी की सफाई और पुनर्जीवन की भी मांग की। विधायक ने कहा कि यदि नदी की साफ-सफाई कर उसे विकसित किया जाए तो उसमें पुनः शुद्ध जल प्रवाहित हो सकता है और पर्यावरण संतुलन को भी लाभ मिलेगा।

अयोध्या से सटी विधानसभा का जिक्र

विधायक ने कहा कि उनकी विधानसभा अयोध्या से सटी हुई है और यह क्षेत्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उल्लेख किया कि यहां भगवान श्रीराम की गायें चरती थीं और ऋषि-मुनियों की परंपरा से जुड़ा इतिहास रहा है। अयोध्या के विकास का लाभ भी तरबगंज क्षेत्र को मिल रहा है।

तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडेय द्वारा विधानसभा में उठाए गए मुद्दे क्षेत्रीय विकास से सीधे जुड़े हैं। आयुष मेडिकल कॉलेज, कैथी घाट पुल और टेढ़ी नदी के पुनर्जीवन जैसे प्रस्ताव यदि स्वीकृत होते हैं, तो गोंडा जिले के तरबगंज क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है और बजट में इनके लिए कितनी प्राथमिकता दी जाती है।

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