घर के पास ज्यादा स्ट्रीट फूड की दुकानें? बढ़ सकता है मोटापा और डायबिटीज का खतरा, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

अगर आपके घर के आसपास हर गली-नुक्कड़ पर चाट, समोसा, मोमोज या अन्य स्ट्रीट फूड की दुकानें हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। एक नई स्टडी के अनुसार, ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दोगुना तक बढ़ सकता है।

यह खुलासा Madras Diabetes Research Foundation की एक रिसर्च में हुआ है। इस स्टडी को भारत के रिसर्चर्स ने यूके के डॉक्टरों के साथ मिलकर किया। इसमें पाया गया कि जिन इलाकों में अनहेल्दी स्ट्रीट फूड या फास्ट फूड आउटलेट ज्यादा होते हैं, वहां रहने वाले लोगों में मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ खाने की आदतों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास का फूड एनवायरनमेंट भी हमारे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है।


स्टडी में क्या सामने आया?

इस रिसर्च में पाया गया कि जिन मोहल्लों में स्ट्रीट फूड के आउटलेट ज्यादा थे, वहां रहने वाले लोगों में इन समस्याओं का जोखिम अधिक था:

  • मोटापा

  • टाइप-2 डायबिटीज

  • फैटी लिवर

  • हाई ब्लड प्रेशर

रिसर्च के अनुसार, इन बीमारियों के एक साथ होने की स्थिति को “डायबिसिटी” (Diabesity) कहा जाता है, यानी मोटापा और डायबिटीज का खतरनाक मेल।

एक अन्य रिपोर्ट, जो National Library of Medicine में प्रकाशित हुई, उसमें भी बताया गया कि घर के आसपास का फूड एनवायरनमेंट सीधे तौर पर हमारी सेहत को प्रभावित करता है।


आसपास मिलने वाला खाना हमारी आदतों को कैसे बदलता है?

आमतौर पर लोग अपने घर या ऑफिस के आसपास उपलब्ध दुकानों से ही ज्यादा खरीदारी करते हैं। यह सुविधा और समय बचाने से जुड़ी आदत है।

अगर आसपास स्ट्रीट फूड या फास्ट फूड ज्यादा उपलब्ध है, तो लोग अक्सर वही खाने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और अनहेल्दी फूड का सेवन बढ़ जाता है।

यही वजह है कि एक्सपर्ट्स फूड एनवायरनमेंट को स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं।


स्ट्रीट फूड से किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है?

जब लोग बार-बार स्ट्रीट फूड खाते हैं, तो शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं।

इनसे इन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है:

  • तेजी से वजन बढ़ना

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस

  • टाइप-2 डायबिटीज

  • हाई ब्लड प्रेशर

  • दिल की बीमारियां

कई स्ट्रीट फूड में हाई कैलोरी, सैचुरेटेड फैट, ज्यादा नमक और शुगर होती है, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।


क्यों इतना आकर्षक लगता है स्ट्रीट फूड?

स्ट्रीट फूड लोकप्रिय होने के कई कारण हैं:

  • आसानी से उपलब्ध

  • जल्दी तैयार हो जाता है

  • सस्ता होता है

  • स्वादिष्ट और मसालेदार होता है

  • समय और मेहनत बचाता है

यही कारण है कि व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर इन्हीं विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं।


क्या स्ट्रीट फूड एडिक्टिव भी हो सकता है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि फास्ट फूड में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (मैदा और चीनी) दिमाग पर उसी तरह असर डाल सकते हैं जैसे नशीले पदार्थ।

साल 2018 में Clinical Chemistry में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, ऐसे फूड्स खाने से शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।

इससे दिमाग में डोपामिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज होता है, जो खुशी का एहसास देता है। यही वजह है कि लोग बार-बार ऐसे फूड खाने की इच्छा महसूस करते हैं।


पार्क और जिम की कमी भी बढ़ाती है खतरा

स्टडी में एक और दिलचस्प बात सामने आई। जिन लोगों में डायबिसिटी पाई गई, उनमें से लगभग 56.2% लोग पार्क, जिम, प्लेग्राउंड या स्पोर्ट्स क्लब से 1.1 किलोमीटर से ज्यादा दूर रहते थे।

इसका मतलब यह है कि अगर आसपास एक्सरसाइज की सुविधाएं कम हैं, तो लोगों की फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो जाती है। इससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा और बढ़ सकता है।


फूड हैबिट्स सुधारने के 11 आसान टिप्स

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ छोटी-छोटी आदतें अपनाकर आप अपनी फूड हैबिट्स को बेहतर बना सकते हैं:

  1. घर का बना संतुलित खाना खाएं

  2. बाजार जाते समय हेल्दी फूड खरीदें

  3. ज्यादा तला-भुना खाना कम करें

  4. फल और सब्जियां ज्यादा खाएं

  5. प्रोसेस्ड फूड कम करें

  6. मीठे पेय पदार्थ कम पिएं

  7. रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें

  8. सीढ़ियों का इस्तेमाल करें

  9. लंबे समय तक बैठे न रहें

  10. पर्याप्त पानी पिएं

  11. रोज 7-8 घंटे की नींद लें

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