अक्सर: खांसी, थकान, कमजोरी या हल्का बुखार जैसे लक्षणों को लोग सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यही सामान्य दिखने वाले संकेत कई बार एक गंभीर समस्या—‘साइलेंट हार्ट अटैक’—का इशारा भी हो सकते हैं, खासतौर पर महिलाओं में।
हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, 55 साल से कम उम्र की लगभग हर पांच में से एक महिला को हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द नहीं होता। ऐसे मामलों में केवल थकान, मतली, सांस फूलना या हल्की असहजता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग अक्सर गंभीरता से नहीं लेते।
साइलेंट हार्ट अटैक क्या है?
साइलेंट हार्ट अटैक भी सामान्य हार्ट अटैक की तरह ही होता है, जिसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो जाती है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें शरीर स्पष्ट चेतावनी नहीं देता। सीने में तेज दर्द की बजाय हल्के या अस्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं।
इस स्थिति में दिल की मांसपेशियों को नुकसान होता रहता है, लेकिन व्यक्ति को इसका एहसास नहीं होता। कई बार यह नर्व्स की कम संवेदनशीलता के कारण होता है, जिससे दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का लगता है।
महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। इसके पीछे कई कारण हैं।
पहला कारण है ब्लॉकेज का पैटर्न। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में ब्लॉकेज स्पष्ट होता है, जबकि महिलाओं में छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है, जिसे पहचानना मुश्किल होता है।
दूसरा कारण है हार्मोनल बदलाव। महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन दिल को कुछ हद तक सुरक्षा देता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद इसका स्तर कम हो जाता है और जोखिम बढ़ जाता है।
तीसरा कारण है दर्द को महसूस करने का तरीका। कई महिलाएं दर्द को कम महसूस करती हैं या उसे नजरअंदाज कर देती हैं।
कौन-कौन से संकेत हो सकते हैं?
महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण बेहद सामान्य लग सकते हैं, जैसे—
- बिना कारण अत्यधिक थकान
- कमजोरी या चक्कर आना
- सांस लेने में परेशानी
- मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
- हल्का बुखार या फ्लू जैसा अहसास
- गर्दन, पीठ, जबड़े या कंधे में दर्द
इनमें सबसे महत्वपूर्ण संकेत है—अचानक और लगातार बनी रहने वाली थकान। कई रिसर्च में यह पाया गया है कि हार्ट अटैक से पहले महिलाओं को महीनों तक असामान्य थकान महसूस होती रहती है।

तनाव भी बढ़ाता है खतरा
मानसिक तनाव और डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन जैसे कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ते हैं।
यह स्थिति दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है और समय के साथ हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा देती है।
कब सतर्क हो जाएं?
अगर 55 वर्ष की उम्र के बाद आपको बार-बार थकान, सांस फूलना या शरीर में असामान्य बदलाव महसूस हो रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। खासतौर पर अगर ये लक्षण बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें?
साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इसके अलावा समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।