नवजोत सिद्धू ने लिया बड़ा फैसला: करोड़ों के घर बच्चों में बांटे, बोले—“राजनीति से एक पैसा नहीं लिया”

पटियाला: पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व क्रिकेटर Navjot Singh Sidhu एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह राजनीति नहीं, बल्कि उनका पारिवारिक फैसला है। सिद्धू ने अपने दोनों घरों का बंटवारा कर दिया है—अमृतसर का आलीशान घर बेटी राबिया को और पटियाला का पुश्तैनी मकान बेटे करन को सौंप दिया है।

इस फैसले की जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी। पोस्ट के साथ उन्होंने अमृतसर स्थित घर के गृह प्रवेश की तस्वीरें भी साझा कीं, जिसमें उनका पूरा परिवार नजर आया।

पोस्ट में क्या लिखा सिद्धू ने?

नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह घर उन्होंने अपनी मेहनत से बनाया है और इसमें राजनीति से कमाया हुआ एक भी पैसा शामिल नहीं है। उन्होंने इसे माता पार्वती की कृपा बताया और कहा कि उन्होंने अमृतसर के लोगों से जो वादा किया था, उसे निभाने की कोशिश की है।

उन्होंने लिखा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर उन्हें एक नई प्रेरणा मिली, जिसके बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों का भी जिक्र किया—चाहे वह टीवी शो हों, कमेंट्री हो या अन्य पेशेवर काम—इन सबके जरिए उन्होंने अपनी आय अर्जित की।

किसे मिला कौन सा घर?

सिद्धू के फैसले के अनुसार—

  • अमृतसर का आधुनिक और लग्जरी घर उनकी बेटी राबिया को दिया गया है।
  • पटियाला का पुश्तैनी मकान उनके बेटे करन के नाम किया गया है।

यह कदम परिवार के भीतर संपत्ति के स्पष्ट और पारदर्शी बंटवारे के रूप में देखा जा रहा है।

अमृतसर का घर: लग्जरी और आस्था का संगम

अमृतसर स्थित यह घर करीब 49,500 वर्ग फीट (1.1 एकड़) में फैला हुआ है और इसे 2014-15 के आसपास लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। यह शहर के पॉश इलाके में स्थित है और इसमें कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं—जैसे स्विमिंग पूल, जिम, स्पा और एक भव्य मंदिर।

इस घर की खास बात इसका धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप भी है। गृह प्रवेश के दौरान यहां एक विशेष शिवलिंग स्थापित किया गया था, जिसे सिंगापुर से मंगवाया गया था। बताया जाता है कि इसकी कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये है।

इसके अलावा घर में माता गायत्री, भगवान गणेश सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। एक अलग कक्ष में Guru Granth Sahib को भी स्थान दिया गया है, जो इस घर की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करता है।

पुराने वादों और नई शुरुआत का जिक्र

सिद्धू ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि जब उन्होंने अमृतसर में घर बनाया था, तब लोगों ने कहा था कि चुनाव के बाद वे शहर छोड़ देंगे। लेकिन उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया था कि वे यहीं रहेंगे। हालांकि सांसद के रूप में दो कार्यकाल पूरे करने के बावजूद वे उस वादे को पूरी तरह निभा नहीं सके।

अब इस फैसले के जरिए वे अपने जीवन में एक नई शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।

राजनीति से दूरी या नई रणनीति?

हाल ही में Kapil Sharma के शो के प्रमोशन के दौरान सिद्धू मोहाली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राजनीति पर कोई बयान नहीं दिया, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि वे फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बना रहे हैं।

हालांकि मंच पर हल्के-फुल्के अंदाज में कपिल शर्मा ने मजाक में कहा कि “इस बार वोट सिद्धू को देना”, जिस पर सिद्धू मुस्कुराते नजर आए।

परिवार और विरासत को प्राथमिकता

सिद्धू का यह फैसला केवल संपत्ति का बंटवारा नहीं, बल्कि परिवार और विरासत को प्राथमिकता देने का संकेत भी माना जा रहा है।

आज के दौर में जहां संपत्ति विवाद आम हैं, वहां इस तरह का स्पष्ट और स्वैच्छिक बंटवारा एक सकारात्मक उदाहरण पेश करता है।

नवजोत सिंह सिद्धू का यह कदम उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत को दर्शाता है। जहां एक ओर उन्होंने अपनी मेहनत से अर्जित संपत्ति को बच्चों में बांटा, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया कि पारदर्शिता और परिवारिक संतुलन सबसे अहम है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धू आगे राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं या निजी जीवन पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

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