दिल्ली यूनिवर्सिटी: में पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने अपने रिलेशनशिप को लेकर गंभीर सवाल उठाया है। वह पिछले एक साल से एक रिश्ते में हैं, लेकिन उन्हें अपने पार्टनर के व्यवहार से असहजता महसूस हो रही है। उनका कहना है कि उनका बॉयफ्रेंड हर चैट का स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है—कब क्या कहा, कैसे कहा—सबका रिकॉर्ड।
जब भी दोनों के बीच झगड़ा होता है, वह पुराने मैसेज निकालकर सबूत की तरह दिखाने लगता है। पहली बार जब उसने स्क्रीनशॉट दिखाया, तो छात्रा को गहरा झटका लगा। अब सवाल यह है—क्या यह सामान्य व्यवहार है? क्या यह सिर्फ ट्रस्ट की कमी है या कोई बड़ा रेड फ्लैग?
इस मामले पर नोएडा की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल ने विस्तार से समझाया।
क्या हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी है?
डॉ. जया सुकुल के मुताबिक, रिश्ता कोर्टरूम नहीं होता। अदालत में जज को फैसला सुनाने के लिए सबूत चाहिए होते हैं, लेकिन रिलेशनशिप में भरोसा, संवाद और भावनात्मक सुरक्षा सबसे जरूरी होती है।
अगर कोई पार्टनर हर बातचीत का रिकॉर्ड रखता है और विवाद के समय उसे ‘सबूत’ की तरह इस्तेमाल करता है, तो यह एक अनहेल्दी पैटर्न हो सकता है। यह व्यवहार धीरे-धीरे रिश्ते को प्रतिस्पर्धा या जांच-पड़ताल में बदल सकता है।
इसका भावनात्मक असर क्या होता है?
ऐसे व्यवहार का असर सामने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर गहरा पड़ सकता है। अक्सर तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं:
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डर: कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोचना।
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असुरक्षा: कहीं मेरी बात बाद में मेरे खिलाफ इस्तेमाल न हो जाए।
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खुद पर शक: क्या मैं सच में गलत हूं?
जब किसी को हर शब्द तौलकर बोलना पड़े, तो वह खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाता। धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता खत्म होने लगती है।
क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है?
लोग अक्सर ऐसे मामलों को ट्रस्ट इश्यू कहकर छोड़ देते हैं, लेकिन यह उससे गहरा हो सकता है। हो सकता है कि पार्टनर के पिछले रिश्तों में उसे धोखा मिला हो या उस पर झूठे आरोप लगे हों।
संभव है कि उसकी परवरिश ऐसे माहौल में हुई हो, जहां हर बात का हिसाब रखा जाता हो। ऐसे लोग खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है।
लेकिन—किसी की असुरक्षा को समझना जरूरी है, पर उसकी कीमत पर अपनी मानसिक शांति खो देना समझदारी नहीं।
क्या यह रेड फ्लैग है?
अगर आपको लगता है कि—
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आप खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं,
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हर शब्द सोच-समझकर बोलना पड़ रहा है,
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हर वक्त जजमेंट का डर बना रहता है,
तो यह एक संभावित रेड फ्लैग हो सकता है।
रिश्ते में बराबरी और सुरक्षा की भावना होनी चाहिए। अगर एक व्यक्ति खुद को हमेशा कटघरे में खड़ा महसूस करे, तो यह असंतुलन का संकेत है।

आपको क्या करना चाहिए?
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खुलकर बात करें: शांत समय में अपने पार्टनर से कहें कि यह व्यवहार आपको असुरक्षित महसूस कराता है।
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सीमाएं तय करें: साफ कहें कि झगड़े में पुराने मैसेज सबूत की तरह दिखाना आपको ठीक नहीं लगता।
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काउंसलिंग का सुझाव दें: अगर यह उसकी गहरी असुरक्षा से जुड़ा है, तो प्रोफेशनल हेल्प फायदेमंद हो सकती है।
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खुद की प्राथमिकताएं याद रखें: आपकी पढ़ाई, करियर और मानसिक स्वास्थ्य सबसे अहम हैं।
डॉ. जया सुकुल का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो उसके भीतर डर और अविश्वास गहराई से मौजूद हो सकता है। ऐसे में काउंसलिंग एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
खुद को दोष न दें
अक्सर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देने लगती हैं। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि आपकी भावनाएं पूरी तरह वैध हैं। अगर आपको असहजता हो रही है, तो उसे नजरअंदाज करना सही नहीं।
रिश्ता ऐसा होना चाहिए जो आपको मजबूत बनाए, न कि हर वक्त परीक्षा जैसा महसूस कराए।