कश्मीर: एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार वजह सिर्फ राजनीति या सीमा विवाद नहीं है। नियंत्रण रेखा (LoC) के दोनों ओर सामने आ रही तस्वीरें विकास, प्रशासन और जनजीवन को लेकर बड़ा अंतर दिखा रही हैं।
एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक अधिकारों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी तरफ भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जोजिला सुरंग जैसी रणनीतिक परियोजनाएं नए विकास अध्याय की ओर बढ़ रही हैं।
इन दोनों तस्वीरों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास की दौड़ में कौन आगे है और आम लोगों के जीवन पर इसका क्या असर पड़ रहा है।
PoJK में क्यों बढ़ रहा है असंतोष?
पिछले कई महीनों से PoJK के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में बिजली की दरों में कमी, सस्ता आटा, रोजगार के अवसर और स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक अधिकार देना शामिल है।
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग तो किया जाता है, लेकिन उसका लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंचता।
इंटरनेट बंदी और सुरक्षा कार्रवाई से बढ़ी नाराजगी
रिपोर्टों के अनुसार कई बार प्रदर्शन रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने सख्त कदम उठाए। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गईं।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तारियां और झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष और बढ़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक दबाव और प्रशासनिक मुद्दे PoJK में लगातार चुनौती बने हुए हैं।

जेएएसी आंदोलन क्यों बना चर्चा का केंद्र?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) इस समय PoJK में विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी है।
शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई और बिजली दरों को लेकर था, लेकिन अब इसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय अधिकारों की मांग भी जुड़ गई है।
यही वजह है कि यह आंदोलन अब सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक स्वरूप भी लेता दिखाई दे रहा है।
दूसरी तरफ जोजिला सुरंग ने लिखी नई कहानी
जब PoJK में विरोध प्रदर्शन सुर्खियों में हैं, उसी समय भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में जोजिला सुरंग परियोजना बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी है।
करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग श्रीनगर और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हाल ही में सुरंग के दोनों सिरों को जोड़ने का कार्य पूरा होने के बाद परियोजना को बड़ी सफलता के रूप में देखा गया।
क्यों महत्वपूर्ण है जोजिला सुरंग?
जोजिला दर्रा सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण अक्सर बंद हो जाता है, जिससे लद्दाख का संपर्क प्रभावित होता है।
सुरंग बनने के बाद सालभर आवागमन संभव होगा। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों, पर्यटकों और सुरक्षा बलों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर में तेजी से बदल रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हुआ है।
चिनाब रेल पुल, उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, जेड-मोड़ सुरंग और नई सड़क परियोजनाएं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत कर रही हैं।
इसके अलावा रेल और सड़क नेटवर्क के विस्तार से पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिला है।
पर्यटन और निवेश में भी बढ़ोतरी
कश्मीर घाटी में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। होटल, टैक्सी, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
निवेश प्रस्तावों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। आईटी, कृषि, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
युवाओं के बीच स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिला है, जिससे रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
दोनों क्षेत्रों की तस्वीर क्या बताती है?
नियंत्रण रेखा के दोनों ओर हालात अलग-अलग दिशा में बढ़ते दिखाई देते हैं।
PoJK में जहां महंगाई, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक चुनौतियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं, वहीं भारतीय जम्मू-कश्मीर में सड़क, रेल, सुरंग और पर्यटन आधारित विकास परियोजनाएं प्रमुख केंद्र में हैं।
हालांकि दोनों क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों के स्तर पर अंतर साफ दिखाई देता है।
कश्मीर की दो तस्वीरें आज एक व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर PoJK में जनता बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठा रही है, जबकि दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे रहे हैं।
आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का प्रभाव और अधिक स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल नियंत्रण रेखा के दोनों ओर विकास और जनजीवन की तस्वीरें अलग-अलग कहानी बयां कर रही हैं।